भुरकुंडा (रामगढ़)। पीवीयूएनएल जो एनटीपीसी एवं झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) का संयुक्त उपक्रम है, ने पतरातु सुपर थर्मल पावर परियोजना की यूनिट-2 (800 मेगावाट) के सफल ट्रायल ऑपरेशन के साथ एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। 11 मई 2026 को यूनिट-2 के सफल संचालन के बाद पीवीयूएनएल की कुल स्थापित क्षमता बढ़कर 1600 मेगावाट हो गई है। इसी के साथ एनटीपीसी समूह की कुल स्थापित क्षमता भी 90 गीगावाट के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गई।
इस अवसर पर पीवीयूएनएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अशोक कुमार सहगल ने कहा कि यूनिट-2 के चालू होने के साथ पीवीयूएनएल झारखंड के ऊर्जा क्षेत्र में एक परिवर्तनकारी परियोजना के रूप में उभरा है। उन्होंने बताया कि परियोजना से उत्पादित 85 प्रतिशत बिजली झारखंड राज्य को आवंटित की गई है, जिससे राज्य की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी और औद्योगिक व आर्थिक विकास को नई गति प्राप्त होगी।
उन्होंने कहा कि इससे पूर्व परियोजना की यूनिट-1 का वाणिज्यिक संचालन 5 नवंबर 2025 को घोषित किया गया था, जबकि यूनिट-2 ने मार्च 2026 में पूर्ण भार क्षमता हासिल कर ली थी। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान पीवीयूएनएल द्वारा कुल 2,062.90 मिलियन यूनिट (एमयू) बिजली उत्पादन किया गया। वहीं परियोजना की यूनिट-3 का निर्माण कार्य भी तेजी से जारी है और इसे वित्तीय वर्ष 2026-27 में चालू करने का लक्ष्य रखा गया है।
पीवीयूएनएल की यह परियोजना उन्नत अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल तकनीक, एयर कूल्ड कंडेंसर एवं 100 प्रतिशत ड्राई ऐश सिस्टम पर आधारित है, जो पर्यावरण अनुकूल एवं सतत तापीय ऊर्जा उत्पादन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके साथ ही पीवीयूएनएल कौशल विकास एवं क्षमता निर्माण के माध्यम से भविष्य के लिए तैयार कार्यबल तैयार करने की दिशा में भी कार्य कर रहा है।
श्री सहगल ने कहा कि पीवीयूएनएल एवं एनटीपीसी राष्ट्र के ऊर्जा क्षेत्र की प्रगति में योगदान देते हुए विश्वसनीय एवं सतत विद्युत आपूर्ति के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए एनटीपीसी, जेबीवीएनएल, झारखंड सरकार, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण विद्युत मंत्रालय, भेल, सहयोगी संस्थाओं, श्रमिकों एवं सभी हितधारकों के सहयोग और समर्थन के प्रति आभार व्यक्त किया।


