भुरकुंडा (रामगढ़)। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के पितृपुरुष एवं जननायक दिशुम गुरु शिबू सोरेन के निधन पर शुक्रवार को झामुमो कार्यालय भुरकुंडा में शोकसभा सह श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान झारखंड आंदोलन के अमर शहीद निर्मल महतो की 38वीं शहादत दिवस भी मनाई गई। सभा की अध्यक्षता झामुमो के पतरातु प्रखंड अध्यक्ष झलकू बेदिया और संचालन प्रखंड सचिव उदय अग्रवाल ने किया।
सर्वप्रथम दिशुम गुरु स्व. शिबू सोरेन और स्व. निर्मल महतो के तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। तत्पश्चात उपस्थित सभी लोगों ने दिवंगत आत्माओं की शांति को लेकर दो मिनट का मौन रखकर ईश्वर से प्रार्थना की और श्रद्धांजलि अर्पित की। मौके पर प्रखंड अध्यक्ष झलकू बेदिया और सचिव उदय अग्रवाल ने कहा कि शिबू सोरेन सिर्फ एक राजनेता नहीं, बल्कि झारखंडी अस्मिता के प्रतीक थे।
उन्हें श्दिशुम गुरु (आदिवासी जनता के मार्गदर्शक) के रूप में जाना जाता है। उन्होंने कहा कि झारखंड आंदोलन की पृष्ठभूमि में उनका योगदान अतुलनीय रहा है। उन्होंने आदिवासी समाज के अधिकारों, जंगल-जमीन की सुरक्षा और झारखंड राज्य की स्थापना के लिए दशकों तक संघर्ष किया। वे कई बार झारखंड मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष रहे और भारत सरकार में केंद्रीय मंत्री भी बने। 2004 में वे कोयला मंत्री बने, और तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री पद की भी जिम्मेदारी संभाली।
उनका राजनीतिक जीवन जितना संघर्षपूर्ण था, उतना ही प्रेरणादायक भी। झारखंड आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाने में उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही। आज भी उन्हें झारखंड के जननायक के रूप में याद किया जाता है। वक्ताओं ने शिबू सोरेन व निर्मल महतो के जीवनी पर प्रकाश डालते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
श्रद्धांजलि अर्पित करने वालो में धनंजय वर्मा, केंद्रीय सदस्य हरीलाल बेदिया, संजय वर्मा, सीताराम बेदिया, राजेंद्र बेदिया, रणधीर कुमार साहू, योगेंद्र यादव, सुरेश महतो, वीरेंद्र यादव, जग्गू घांसी, लखन मुंडा, दीपक कुमार, मुमताज अंसारी, उदय मालाकार, गोकुल राम, मुंद्रिका राम, मोहनलाल बेदिया, दारा सिंह, नरेश बेदिया, आजाद अंसारी, जयप्रकाश बेदिया, महावीर मुंडा, नागेंद्र सिंह, चरकु गंझू, मालवीर बेदिया, महेंद्र बेदिया, शिवनारायण प्रसाद, चंद्रदेव बेदिया, सोहराय गंझू, मुख्तार अंसारी सहित दर्जनों कार्यकर्ता और नेता शामिल थें।


