श्री अग्रसेन स्कूल भुरकुंडा में धूमधाम से मना करमा महोत्सव, सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने मोहा मन
पारंपरिक ढंग से हुई करम डाल की पूजा, लोकनृत्य व गीत प्रस्तुत कर बच्चों ने मोहा मन
भुरकुंडा (रामगढ़)। भाई-बहन के निश्छल प्रेम व प्रकृति का पर्व करमा के अवसर पर श्री अग्रसेन स्कूल भुरकुंडा में मंगलवार को करमा महोत्सव का आयोजन किया गया। महोत्सव की शुरुआत करम डाल स्थापित कर उसकी पूजा-अर्चना से हुई। बच्चों ने करमा पर्व से जुड़ी लोककथा भी सुनी। महोत्सव के दौरान करमा के गीत वातावरण में घुलते रहे। छात्र-छात्राओं ने करम डाल के पास पारंपरिक नृत्य कर आयोजन को यादगार बनाया।

छात्राओं ने करम करम कहले आए करम दिन… व सातो भइया रे सातो करम गाड़े… आदि लोकगीतों की भी प्रस्तुति की। इस अवसर पर मुख्य अतिथि झारखंड मुक्ति मोर्चा के हजारीबाग जिलाध्यक्ष संजीव बेदिया ने कहा कि करमा आदिवासी समाज के साथ ही मानव जाति के हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणादायी है, जो प्रकृति प्रेमी है। सच यह है कि आज के दौर में पर्यावरण असंतुलन एक गंभीर समस्या बन गई है।

इससे करमा पर्व की महत्ता और बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि प्रकृति हमारे जीवन में हर रूप में शामिल है। इसलिए आदिवासी समाज के इस प्रकृति प्रेम को हमें समाज के अन्य लोगों तक भी पहुंचाने की जरूरत है। श्री बेदिया ने नृत्य करने वाले विद्यार्थियों को नकद 11 हजार रुपये देकर पुरस्कृत किया। साथ ही छात्राओं के लिए 100 आदिवासी साड़ी और छात्रों के लिए 50 धोती देने की घोषणा की।
स्कूल के निदेशक प्रवीण राजगढ़िया ने झारखंड की संस्कृति को एक समृद्ध संस्कृति बताते हुए कहा कि प्रकृति पर्व करमा का अपना एक विशेष महत्व है। यह झारखंड की संस्कृति को प्रदर्शित करता है। महोत्सव के दौरान श्री राजगढ़िया ने मुख्य अतिथि को मान पत्र भेंट कर सम्मानित किया।
महोत्सव को सफल बनाने में साधना सिन्हा, सोनम खातून, मम्पी पाल, शालू कुमारी, मंजू कुमारी समेत स्मृति टोप्पो, विद्या कुमारी, अंशु कुमारी, संध्या कुमारी, एंजेल वर्मा, अंजलि कुमारी, कोमल कुमारी, शीतल कुमारी, नवलीन, प्राची, चारुलता, तन्मय ईशु उरांव, सुजल सोरेन, रुखसार परवीन, माही मरियम, आराधना कुमारी, रिमिल हांसदा, आयुष कुमार आदि का योगदान रहा।


