भुरकुंडा (रामगढ़)। भारत की अग्रणी इस्पात निर्माता कंपनी जिंदल स्टील ने आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ाया है। कंपनी ने ओडिशा के अंगुल स्थित अपने एकीकृत इस्पात संयंत्र में 3 मिलियन टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) क्षमता वाले नए बेसिक ऑक्सीजन फर्नेस (बीओएफ) को सफलतापूर्वक चालू कर दिया है।
इसके साथ ही संयंत्र की कुल कच्चा इस्पात निर्माण क्षमता 6 एमटीपीए से बढ़कर 9 एमटीपीए हो गई है। नया बीओएफ ब्लास्ट फर्नेस-2 के साथ समकालिक रूप से कमीशन किया गया है, जिससे हॉट मेटल से लेकर फिनिश्ड स्टील तक का पूरा उत्पादन प्रवाह और अधिक समन्वित एवं कुशल हो गया है। यह कदम न केवल जिंदल स्टील के उत्पादन विस्तार की दिशा में ऐतिहासिक पड़ाव है
बल्कि भारत को इस्पात क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। कंपनी का लक्ष्य चालू वित्त वर्ष में अंगुल संयंत्र की क्षमता को आगे बढ़ाकर 12 एमटीपीए तक पहुंचाने का है। उत्पादन क्षमता में हुई इस वृद्धि से बुनियादी ढांचा, ऊर्जा, ऑटोमोबाइल, तेल एवं गैस और रियल एस्टेट जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले इस्पात की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
इस अवसर पर जिंदल स्टील के अध्यक्ष नवीन जिंदल ने कहा नया बीओएफ अब संचालन में आ गया है और पहली हीट टैप सफलतापूर्वक हो गई है। यह अंगुल संयंत्र की वास्तविक शक्ति का प्रतीक है। यहां बनने वाला हर एक टन इस्पात भारत की आत्मनिर्भरता को मजबूती देता है।
जिंदल स्टील माइन-टू-मेटल मॉडल का मजबूत स्तंभ
जिंदल स्टील देश के अग्रणी एकीकृत इस्पात उत्पादकों में से एक है। 12 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक के निवेश के साथ कंपनी अंगुल, रायगढ़ और पतरातू में अत्याधुनिक इस्पात संयंत्र संचालित करती है। कंपनी अपने माइन-टू-मेटल मॉडल के माध्यम से खदानों से लेकर तैयार उत्पाद तक की संपूर्ण प्रक्रिया को खुद नियंत्रित करती है, जिससे लागत में कमी और गुणवत्ता में अधिकतम भरोसा सुनिश्चित होता है।


