रिपोर्ट एस कुमार
गिद्दी/सिरका। नेम निष्ठा का चार दिवसीय छठ महापर्व के रविवार को दूसरे दिन पूरे क्षेत्र में छठी मैया की गीत पहिले पहिले कइनी हम व्रतिया, कांच ही कांच के बहँगिया आदि गीतों के साथ। खरना वाले दिन रविवार को छठ व्रतियों के द्वारा स्नान-ध्यान करने के बाद छठ पूजा करने वाले व्रती लोग 36 घंटे का निर्जला व्रत प्रारंभ करते किया।
आज पंचमी के दिन व्रती पूरे दिन बगैर कुछ खाए पिये रहे और शाम के समय स्नान-ध्यान दोबारा करके तन और मन से पवित्र हुई। इसके बाद अपने पूजा स्थल को साफ करके मिट्टी के नए चूल्हे पर भोग की सामग्री बनाई। मौके पर पहली बार छठ कर रही मिनांक्षी पाण्डेय ने कहा कि आज के दिन स्नान करने के बाद नये कपड़े पहनकर भोग बनाने की परंपरा है।
छठी मैया को भोग लगाने के लिए दूध की खीर और घी चुपड़ी (रोटी) बनाई जाती है। अत्यंत ही पवित्रता के साथ बनाए जाने वाली भोग प्रसाद में चीनी या नमक का प्रयोग नहीं किया जाता है। खीर में गुड़ का प्रयोग होता है। इसी के साथ छठी माई का आगमन हिंदू मान्यता के अनुसार कार्तिक मास के शुक्लपक्ष की पंचमी तिथि यानि खरना के दिन ही संतान सुख को बढ़ाने वाली छठी माता का आगमन होता है।
ऐसे में आज सायंकाल सूर्यास्त के बाद उनका आह्वान किया जाएगा। गौरतलब है कि छठ पूजा में भगवान भास्कर के साथ षष्ठी देवी की विशेष रूप से पूजा की गई। वही छठ पूजा को लेकर पूरा गिद्दी कोयलांचल सहीत आस पास के क्षेत्रों के भक्ती का बयार बह रहा है।


