रिपोर्ट सज्जाद आरिफ
दुलमी। रविवार को 12 बजे दिन में दुलमी प्रखंड अंतर्गत ढुठूवा गांव में एक दिवसीय सत्संग का आयोजन किया गया। जिसमें संत रामपाल जी महाराज के प्रवचनों को प्रोजेक्टर के माध्यम से चलाया गया। सत्संग में संत रामपाल जी महाराज ने बताया कि जप-तप, ध्यान और योग से मोक्ष प्राप्त नहीं हो सकता है। मुक्ति प्राप्त करने के लिए वेदों, शास्त्रों और श्रीमद्भगवद् गीता के प्रमाणों के आधार पर बताए कि सतगुरु से नाम दीक्षा ले कर साधना करने से ही मन को शांति और आत्मा को पूर्ण मोक्ष हो सकता है।

सत्संग में आगे प्रमाणों के साथ बताया गया कि वेद बताते हैं कि “परम पद की प्राप्ति केवल उस परमेश्वर की शरण से ही संभव है जो सबके ऊपर है।” इसी तरह अथर्ववेद कांड 4 सूक्त 1 मंत्र 7 में वर्णित है कि सृष्टिकर्ता परमेश्वर ही मोक्ष मार्ग का द्वार खोलता है, न कि तपस्या या योग की सिद्धियाँ। गीता अध्याय 8 श्लोक 16 का प्रमाण देते हुए बताया गया कि “योग, ध्यान और तपस्या करने वाले साधक भी ब्रह्मलोक तक ही जाते हैं, जहाँ से पुनः जन्म-मरण में लौटना पड़ता है।”
इसी प्रकार गीता अध्याय 17 श्लोक 23 में स्पष्ट है कि मोक्ष मार्ग “ओम् तत् सत्” पूर्ण गुरु ही दे सकता है। जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु सत्संग सुने और आयोजन में सेवादार भक्त करन सिंह, बालगोविंद कुमार, सत्यप्रकाश ठाकुर, अभिषेक, बबलू,मधु, प्रेम, रुपेश, प्रदीप उपस्थित रहे।


