दिसंबर के अंत तक मांगें नहीं मानी गईं तो काम ठप करने की चेतावनी
भुरकुंडा (रामगढ़)। एस माउंट निर्माणाधीन परियोजना से जुड़े विस्थापित व प्रभावित ग्रामीणों ने पीवीयूएनएल प्रबंधन के कथित मनमाने रवैये के खिलाफ कड़ा आक्रोश जताया है। बलकुदरा, जयनगर, रसदा और गेगदा गांवों के विस्थापित प्रभावित ग्रामीणों की बैठक बलकुदरा में मुखिया विजय मुंडा की अध्यक्षता में हुई।
बैठक में ग्रामीणों ने बताया कि लगभग सात माह पूर्व सांसद मनीष जायसवाल, विधायक रोशन लाल चौधरी एवं विस्थापित प्रभावितों की उपस्थिति में उपायुक्त की अध्यक्षता में त्रिपक्षीय वार्ता हुई थी। उस वार्ता में एस माउंट परियोजना से जुड़े चार गांवों को नियोजन में अधिकतम प्राथमिकता देने, अन्य 22 गांवों को भी प्राथमिकता के दायरे में शामिल करने, 60 वर्ष तक स्थायी नियोजन की व्यवस्था करने तथा स्थानीय विस्थापित-प्रभावित संवेदकों को 50 प्रतिशत ठेका कार्य देने पर सहमति बनी थी।
इसके लिए पीवीयूएनएल प्रबंधन को नियमावली बनाकर जारी करने का निर्देश भी दिया गया था, लेकिन अब तक यह नियमावली जारी नहीं की गई है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि उपायुक्त के निर्देशानुसार छाई डेम क्षेत्र में जिन किसानों ने अपनी भूमि पर धान के बिछड़े लगाए थे, उनकी फसल से होने वाली उपज का मुआवजा देने का आश्वासन भी प्रबंधन ने नजरअंदाज कर दिया है। इससे विस्थापित-प्रभावित ग्रामीणों में भारी रोष है।
बैठक में उपस्थित ग्रामीणों ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि यदि दिसंबर के अंतिम सप्ताह तक उनकी जायज मांगों पर पीवीयूएनएल प्रबंधन कोई ठोस पहल नहीं करता है, तो सभी रैयत व विस्थापित-प्रभावित ग्रामीण एस माउंट परियोजना में चल रहे कार्यों को पूरी तरह बाधित करेंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन और प्रबंधन की होगी। बैठक में अनिकेत सोनी, संदीप मुंडा, कृष्णा मुंडा, राहुल मुंडा, कमलेश यादव, शंकर प्रसाद, सूरज सोनी, रोहित प्रसाद, सोनी, आशीष प्रसाद, रॉकी मुंडा सहित दर्जनों ग्रामीण मौजूद थे।


