भुरकुंडा (रामगढ़)। दक्षिण झारखंड संभाग रांची के अंतर्गत रामगढ़ अंचल के पतरातू एवं भुरकुंडा संच में बुधवार को किसानों के लिए एकदिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह प्रशिक्षण पतरातू संच के विद्यालय ग्राम राजाबेड़ा तथा भुरकुंडा संच के विद्यालय ग्राम कुसियारा में आयोजित हुआ। कार्यक्रम का नेतृत्व अंचल गतिविधि प्रमुख अजीत कुमार महतो ने किया।
प्रशिक्षण के दौरान किसानों को केंचुआ खाद (वर्मी कंपोस्ट) उत्पादन की विधि, उसकी उपयोगिता तथा गोमूत्र आधारित कीटनाशक बनाने और उसके फायदे के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। अजीत महतो ने बताया कि वर्मी कंपोस्ट मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने, फसल उत्पादन में सुधार, मिट्टी की संरचना को भुरभुरी बनाने और जल संरक्षण क्षमता बढ़ाने में अत्यंत सहायक है। यह रासायनिक खाद का सुरक्षित व पर्यावरण-फ्रेंडली विकल्प है जो फसलों को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करता है एवं लाभकारी सूक्ष्म जीवों की संख्या बढ़ाता है।
उन्होंने यह भी बताया कि गोमूत्र आधारित कीटनाशक फसलों को कीटों व रोगों से बचाने में प्रभावी है। यह मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार करता है और उपज की गुणवत्ता बढ़ाता है। इसके उपयोग से पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं होता, जो इसे रासायनिक कीटनाशकों से बेहतर विकल्प बनाता है।
कार्यक्रम में पतरातू संच प्रमुख नागेश्वर महतो, भुरकुंडा संच प्रमुख शांति देवी, आचार्य सुनीता देवी, नेहा देवी, मंजू देवी, किसान उमेश बेदिया, राजेश बेदिया, सुमन देवी, ललिता देवी, फूलो देवी, प्रभा देवी, निम्मी देवी, उषा देवी, सुनीता देवी, चरकी देवी सहित कई ग्रामीण किसान उपस्थित थे। कहा गया कि इस प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों को जैविक खेती की ओर प्रोत्साहित करना और उन्हें प्राकृतिक संसाधनों से टिकाऊ कृषि पद्धतियां अपनाने के लिए जागरूक करना था।


