निम्मी, लादी, चिकोर और पीरी गांव के सैकड़ों लोग महाधरना हुए शामिल
भुरकुंडा (रामगढ़)। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर कुशवाहा समाज के सैकड़ों लोग बुधवार को भुरकुंडा के मतकमा चौक से रांची में आयोजित महाधरना में शामिल होने के लिए रवाना हुए। इस दौरान निम्मी, लादी, चिकोर और पीरी गांव सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में समाज के सदस्य एकत्रित हुए। धरना में शामिल होने से पहले समाज के लोगों ने एकजुटता का परिचय देते हुए अपने अधिकारों की लड़ाई को और मजबूती से आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
उन्होंने कहा कि रांची के लोकपाल भवन (राज्यपाल भवन) के समक्ष होने वाला यह महाधरना समाज की आवाज़ को बुलंद करने और अधिकारों की प्राप्ति के लिए ऐतिहासिक कदम साबित होगा। रवाना होने वालों में सुरेश कुमार दांगी, देवानंद कुमार, कृष्णा कुमार दांगी, योगेश दांगी, झमन कुमार, धर्मदेव कुमार, सोहन महतो, भूपति महतो, द्वारिका महतो, अनीश कुमार, राजेश कुमार, नारायण महतो, जितेंद्र कुमार, नरेश महतो, रघुनंदन महतो, शिबू महतो, रामू महतो, प्रकाश महतो, टिकेश्वर महतो, होरिल महतो, अमृत महतो, गोतम महतो, मनोज महतो, संदीप कुमार,
बीटू कुमार, अजित कुमार, कमलेश कुमार, गणपत महतो, सतलाल महतो, प्रीतम कुमार, सुकर महतो, सतीश कुमार महतो, बंधन महतो, योगेश्वर महतो, चंद्रदेव महतो, सुजीत कुमार, रवि महतो, साईनाथ महतो, रोहन कुमार, जेठू महतो, पप्पू महतो, मुकेश कुमार, सरजू महतो, संतोष कुमार, रोहित महतो, रोशन कुमार, सत्यनारायण महतो, आनंद महतो समेत दर्जनों लोग शामिल थे।
कुशवाहा समाज की प्रमुख मांगें और उद्देश्य
कुशवाहा समाज ने रांची में आयोजित महाधरना के माध्यम से सरकार के समक्ष अपनी कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। इनमें प्रमुख रूप से पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के 27 प्रतिशत आरक्षण की बहाली, कृषि को उद्योग का दर्जा, और जनसंख्या के अनुपात में राजनीतिक हिस्सेदारी व सम्मान की मांग शामिल है। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि आबादी और योगदान के अनुपात में उन्हें न तो उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिला है
न ही आर्थिक-सामाजिक अवसर। समाज के लोग यह भी चाहते हैं कि सरकार उनकी ऐतिहासिक पहचान और वर्तमान स्थिति को देखते हुए ठोस नीतिगत कदम उठाए। कहा गया कि यह महाधरना न केवल अधिकारों की आवाज़ को बुलंद करने का माध्यम है, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक समानता की दिशा में कुशवाहा समाज की एकजुटता और जागरूकता का प्रतीक भी है।


