रिपोर्ट एस कुमार
सिरका। लोकगायक गोवर्धन गोप स्मृति सम्मान–2026 की घोषणा कर दी गई है। वर्ष 2026 का यह सम्मान वरिष्ठ झारखंड आंदोलनकारी रघु गोप को प्रदान किया जाएगा। खोरठा डहर सह जनकथाकार प्रेमचंद पुस्तकालय” की तीन सदस्यीय चयन समिति द्वारा चतुर्थ स्मृति दिवस के अवसर पर इस सम्मान की घोषणा की गई। रघु गोप झारखंड अलग राज्य आंदोलन के दौरान 17 मार्च 1993 को आहूत आर्थिक नाकाबंदी के सफल संचालन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले आंदोलनकारी रहे हैं।
आंदोलन के क्रम में उन्हें लगभग छह माह तक जेल एवं जेल अस्पताल में रहकर यातनाएँ सहनी पड़ी थीं। वे इस क्षेत्र के ऐसे अकेले आंदोलनकारी माने जाते हैं जिन्हें लंबे समय तक कारावास भुगतना पड़ा। लोकगायक गोवर्धन गोप की स्मृति में इस सम्मान की शुरुआत वर्ष 2023 से की गई है। प्रथम वर्ष यह सम्मान लोकगायक जगरनाथ बेदिया (मिश्राइनमोढ़ा पंचायत, डाड़ी, हजारीबाग) को प्रदान किया गया था। वर्ष 2024 में वरिष्ठ कथाकार कालेश्वर एवं वर्ष 2025 में शहनाई वादक बलराम नायक को यह सम्मान देने की घोषणा की गई थी।
सम्मान के तहत स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्र एवं सम्मान राशि प्रदान की जाएगी। यह समारोह लोकगायक गोवर्धन गोप के पैतृक गांव में 5 जनवरी 2026 को स्मृति दिवस के अवसर पर आयोजित होगा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. पंकज कुमार पंकज (विभागाध्यक्ष, राजनीति विज्ञान, अन्नदा महाविद्यालय) होंगे। मुख्य वक्ता डॉ. लालदीप गोप (तकनीकी अधिकारी, आईआईटी-आईएसएम, धनबाद) तथा विशिष्ट अतिथि झारखंड आंदोलनकारी हीरा गोप होंगे।
यह सम्मान प्रत्येक वर्ष झारखंड की कला, संस्कृति, भाषा, साहित्य, शिक्षा एवं शोध के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तित्व को प्रदान किया जाता है। लोकगायक गोवर्धन गोप अपने जीवनकाल में झारखंड की लोकसंस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर कार्य करते रहे। उन्होंने अपने घर के पास अखड़ा बनवाया, जिसके लिए ढोल, नगाड़ा एवं करताल की व्यवस्था की।
उन्होंने सहिया संस्कृति को बढ़ावा दिया तथा खोरठा, संथाली, बांग्ला एवं छत्तीसगढ़ी लोकगीतों को श्रम करते हुए अखड़ा में सीखने-सिखाने का कार्य किया। लोकझूमर उनके स्मृति-पटल में पुस्तकों की तरह सहेजे हुए थे। लोकगायक गोवर्धन गोप शिक्षा एवं जमीनी संस्कृति से जुड़ाव के लिए लोगों के प्रेरणास्रोत रहे। उक्त जानकारी खोरठा डहर के संस्थापक/अध्यक्ष डॉ. कृष्णा गोप द्वारा दी गई।


