रिपोर्ट आरिफ कुरैशी
रामगढ़। रामगढ़ जिले के मांडू प्रखंड अंतर्गत आरा उतरी पंचायत के ‘आरा बस्ती’ गाँव में रहने वाली सुनीता देवी (पति- सुनील कुमार महतो) की कहानी ग्रामीण भारत की उन लाखों महिलाओं के लिए एक मिसाल है, जो विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सपनों को सच करना जानती हैं। समूह से जुड़ने से पहले सुनीता एक साधारण गृहिणी थीं। उनके पति पारंपरिक तरीके से खेती-बारी करते थे।
मौसम की बेरुखी और सीमित संसाधनों के कारण खेती से इतनी आमदनी नहीं हो पाती थी जिससे परिवार का गुजारा ठीक से चल सके। घर का खर्च चलाना, बच्चों की अच्छी पढ़ाई-लिखाई और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करना सुनीता के लिए एक दैनिक संघर्ष बन चुका था। आर्थिक तंगी के साथ-साथ सुनीता को घर से बाहर निकलकर कुछ करने के आत्मविश्वास की भी भारी कमी थी।
इस अंधकारमय स्थिति में रोशनी की पहली किरण तब आई, जब सुनीता देवी जेएसएलपीएस (झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी) के मार्गदर्शन से, दिनांक 13-10-2017 को गठित ‘तारा सखी मंडल’ से जुड़ीं। समूह में जुड़ने के बाद उन्होंने हर सप्ताह 20 रुपये की बचत करना शुरू किया। साप्ताहिक बैठकों के माध्यम से उन्हें न केवल वित्तीय प्रबंधन की जानकारी मिली, बल्कि उन्हें यह भी समझ आया कि आपसी सहयोग से कैसे बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं।
इससे उनका हौसला बढ़ा और उन्हें आजीविका संवर्धन के नए रास्ते भी दिखाई देने लगे। व्यवसाय शुरू करने के लिए सबसे बड़ी बाधा पूंजी की थी। इस समस्या का समाधान करने के लिए सुनीता ने समूह से शुरुआत में ₹25,000 का ऋण लिया। इस राशि से उन्होंने स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करते हुए शुद्ध और जैविक (ऑर्गेनिक) हल्दी पाउडर बनाने का गृह उद्योग शुरू किया।
सुनीता ने अपने इस व्यवसाय के लिए आसपास के स्थानीय किसानों से ही जैविक हल्दी का कच्चा माल खरीदना शुरू किया। शुरुआत में वह घर पर ही हल्दी को सुखाकर और पिसवाकर स्थानीय बाजारों में बेचने लगीं। सुनीता देवी हर माह 15 से 20 किलो ग्राम शुद्ध और बिना किसी मिलावट के हल्दी पाउडर तैयार करती है। इस जैविक हल्दी की मांग धीरे-धीरे बढ़ने लगी। बाजार में सामान्य हल्दी पाउडर जहाँ कम दाम में मिलता है, वहीं सुनीता की शुद्ध ‘ऑर्गेनिक हल्दी पाउडर’ की गुणवत्ता के कारण बाजार में इसका भाव ₹300 प्रति किलोग्राम तक मिलने लगा।
शुद्धता के इस ब्रांड ने उन्हें बाजार में एक अलग पहचान दिलाई। हल्दी के इस व्यवसाय को और मजबूत करने के लिए सुनीता ने अपनी आजीविका का दायरा बढ़ाने का फैसला किया। हल्दी की फसल के साथ-साथ उन्होंने अपने पति के साथ मिलकर वैज्ञानिक और जैविक तरीके से सब्जी खेती’ (आलू, टमाटर, भिन्डी) भी शुरू कर दी। उन्होंने अपने खेतों में मौसमी सब्जियां उगानी शुरु कीं। रासायनिक खादों की जगह जैविक खाद का उपयोग करने के कारण उनकी सब्जियों की मांग भी बाजार में तेजी से बढ़ने लगी।
अब हल्दी के साथ-साथ हरी सब्जियों की बिक्री से भी परिवार को हर हफ्ते नगद आमदनी होने लगी, जिसने उनके व्यवसाय को एक नई दिशा मिली। जैसे-जैसे काम बढ़ने लगा, पूंजी की आवश्यकता भी बढ़ती गई। सुनीता ने दोबारा समूह के माध्यम से ऋण लेकर अपनी कार्यशील पूंजी को बढ़ाया। उन्होंने बैंक लिंकेज से ₹1,00,000 ऋण लिया। इस राशि से उन्होंने थोक मात्रा में जैविक हल्दी की खरीदारी की और आकर्षक पैकेट बनाकर उसे बड़े बाजारों और मेलों में बेचना शुरू किया।
सब्जी की खेती और जैविक हल्दी के इस दोहरे मुनाफे वाले मॉडल से सुनीता की किस्मत बदल गई। आज सुनीता देवी इस व्यवसाय से हर महीने लगभग ₹15,000 की मासिक आय अर्जित कर रही हैं, जिससे उनकी वार्षिक आय ₹1,50,000 (डेढ़ लाख रुपये) से ऊपर पहुंच गई है। आज सुनीता का परिवार आर्थिक रूप से पूरी तरह आत्मनिर्भर हो चुका है। बच्चों की पढ़ाई बिना किसी रुकावट के अच्छे से चल रही है और घर की आर्थिक स्थिति मजबूत है। लेकिन सुनीता यहीं रुकने वाली नहीं हैं।
अब वह आगे की सोच रही हैं और अपने इस छोटे से गृह उद्योग को एक बड़ी प्रोसेसिंग यूनिट में बदलना चाहती हैं। भविष्य में उनका सपना है कि वह समूह और बैंक के माध्यम से ₹2,00,000 का बड़ा ऋण लेकर खुद की ‘आधुनिक मसाला पीसने वाली मशीन’ (मसाला पल्वराइजर) खरीदें। इस मशीन की मदद से वह केवल हल्दी ही नहीं, बल्कि मिर्च, धनिया, गोलकी और जीरा जैसे अन्य मसालों का भी बड़े पैमाने पर प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) और ब्रांडेड पैकेजिंग करके बड़े शहरों के बाजारों और सुपरमार्केट्स तक पहुंचाना चाहती हैं। सुनीता देवी आज मांडू प्रखंड की सैकड़ों महिलाओं के लिए स्वावलंबन और महिला सशक्तिकरण का एक जीता-जागता प्रतीक बन चुकी हैं।