शिबू सोरेन का जाना एक युग का अंत : प्रो अर्जुन कुमार मिश्रा
भुरकुंडा (रामगढ़)। जुबिली महाविद्यालय भुरकुंडा के भवन संख्या-1 में शुक्रवार को झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और आदिवासी समाज के प्रखर नेता दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। सभा की शुरुआत दिवंगत आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन धारण कर ईश्वर से प्रार्थना की गई। इसके उपरांत उपस्थित प्राध्यापकों, कर्मचारियों और छात्र-छात्राओं ने स्व. शिबू सोरेन की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कॉलेज के प्रभारी प्रचारक प्रो. अर्जुन कुमार मिश्रा ने शिबू सोरेन के जीवन और संघर्षों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका जीवन 11 जनवरी 1944 से लेकर 4 अगस्त 2025 तक संघर्ष, संकल्प और समाज सेवा की अद्वितीय गाथा है। वे तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री और 11 बार सांसद (राज्यसभा) रहे। झारखंड राज्य के गठन में उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही है।
सभा में वक्ताओं ने शिबू सोरेन को झारखंड का अमर सपूत और एक युग का अंत बताते हुए उनके योगदान को नमन किया। मौके पर प्रो. बालकृष्णा, प्रो. राजेश कुमार, डॉ. एसपी पांडये, डॉ. विशेश्वर रविदास, डॉ. एसएस पांडेय, प्रो. टीके झा, प्रो. मनोज कुमार, प्रो. मिथिलेश कुमार, डॉ. एसपी दांगी, प्रो. मनोज प्रसाद, प्रो. मनोज दास, सोमनाथ, रामेश्वर, संध्या, महावीर, शनि,
सुशील आदि वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि दिशोम गुरु का जीवन आने वाली पीढ़ियों को संघर्ष, आत्मबल और सामाजिक न्याय की प्रेरणा देता रहेगा। सभी ने अपने-अपने संबोधन में दिशोम गुरु के योगदान को याद किया और उन्हें एक युग का अंत कहकर झारखंड के अमर पुरुष के रूप में श्रद्धांजलि अर्पित की।


