नागपुर । नागपुर के डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में राष्ट्रीय मुस्लिम मोर्चा का चौथा राष्ट्रीय अधिवेशन रविवार को ऐतिहासिक और सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। अधिवेशन की अध्यक्षता भारत मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मा. वामन मेश्राम ने की। इस अधिवेशन का मुख्य उद्देश्य मुसलमानों को उनके संवैधानिक अधिकारों, सामाजिक न्याय और बराबरी के हक़ के लिए जागरूक कर संगठित संघर्ष को मज़बूती प्रदान करना रहा।
कार्यक्रम में 2025 में संसद द्वारा पारित वक्फ संपत्ति विधेयक और उसके प्रभाव, मुसलमानों को अनुसूचित जाति, ओबीसी की तरह संवैधानिक अधिकार दिलाने की मांग तथा बहुजन समाज (SC, ST, OBC व अल्पसंख्यक) के साझा मुद्दों पर एकजुटता जैसे अहम विषयों पर गंभीर चर्चा हुई। देशभर से आए विद्वान वक्ताओं ने मुसलमानों की सामाजिक, शैक्षणिक और राजनीतिक स्थिति पर प्रकाश डालते हुए भावी संघर्ष की दिशा तय की। अधिवेशन में युवाओं की बड़ी संख्या में सक्रिय भागीदारी ने कार्यक्रम में नई ऊर्जा और विश्वास का संचार किया।

अधिवेशन का उद्घाटन हजरत सैयद मोहम्मद तालीफ़ (सज्जादा-नशीन हजरत बाबा ताजुद्दीन रहमतुल्लाह अलैह, नागपुर) ने किया। मुख्य अतिथियों में रिटायर्ड IPS एवं पूर्व DG मध्यप्रदेश मा. एम. डब्ल्यू. अंसारी, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मा. चौधरी विकास पटेल, एएमयू अलीगढ़ के प्रो. मोहम्मद आसिफ खान, क्षत्रिय मूलनिवासी महासंघ के राष्ट्रीय प्रभारी मा. रविंद्र सिंह बिदावत और मौलाना नोमान रजा (संस्थापक नूरे कुरान प्रकाशन रायपुर) शामिल रहे।
कार्यक्रम का प्रस्तावना भाषण इंजी. सैयद मकसूद (राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय मुस्लिम मोर्चा) ने दिया, जबकि मार्गदर्शन मा. चाँद मुहम्मद (राष्ट्रीय प्रभारी, राष्ट्रीय मुस्लिम मोर्चा) ने प्रदान किया।
अधिवेशन में एजाज तंबोली, मुफ्ती फहीमुद्दीन, अब्दुल गफ्फार नदवी, इमामुल हक अंसारी, जकरिया मोला, एडवोकेट शाकिर कुरैशी, फाजिल मरगूब, मोहम्मद मकसूद आलम, अजीजुर्रहमान, अब्दुल हामिद अजहरी, यास्मीन लाल, शाहिद रजा, सैयद हिब्जुल रहमान, अब्दुल कादिर, असलम सिद्दीकी, भैरव सिंह बिदावत और चौधरी विकाश पटेल सहित अनेक प्रमुख हस्तियों ने शिरकत की। अधिवेशन के अंत में यह संकल्प लिया गया कि संगठित होकर ही मुसलमानों और बहुजन समाज को न्याय और संवैधानिक अधिकार दिलाए जा सकते हैं।


