कोलियरियों में उत्पादन व डिस्पैच पूरी तरह ठप, लगभग 80 प्रतिशत, कामगार रहे ड्यूटी से अनुपस्थित
भुरकुंडा (रामगढ़)। विभिन्न श्रमिक संगठनों द्वारा चार लेबर कोड सहित अन्य मांगों को लेकर आहूत राष्ट्रव्यापी हड़ताल का असर सीसीएल के बरकादृसयाल प्रक्षेत्र में व्यापक रूप से देखा गया। पहली और दूसरी पाली में लगभग 80 प्रतिशत कामगारों ने हड़ताल का समर्थन करते हुए ड्यूटी का बहिष्कार किया। हड़ताल के कारण कोलियरियों में कोयले का उत्पादन पूरी तरह ठप रहा और एक छटांक कोयले का भी डिस्पैच नहीं हो सका।

प्रबंधन के प्रारंभिक आकलन के अनुसार इस हड़ताल से कंपनी को करोड़ों रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। प्रबंधकीय आंकड़ों के मुताबिक पहली पाली में 76 प्रतिशत तथा दूसरी पाली में 77 प्रतिशत मजदूर हड़ताल पर रहे। इस ऐतिहासिक हड़ताल से प्रक्षेत्र में खनन कार्य की रफ्तार पूरी तरह थम गई। सुबह से ही इंटक, एटक, सीटू और एचएमएस से संबद्ध दर्जनों ट्रेड यूनियनों के कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए और कोल इंडिया प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
कई स्थानों पर हड़ताल समर्थकों ने सड़क जाम कर अपना विरोध दर्ज कराया। हालांकि राष्ट्रव्यापी हड़ताल और भारत बंद के आह्वान के बावजूद क्षेत्र के बाजारों और आम जनजीवन पर व्यापक असर नहीं पड़ा। अधिकांश दुकानें खुली रहीं, लेकिन वाहनों के परिचालन पर असर पड़ने से लोगों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। हड़ताल के दौरान क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन भी सतर्क रही।
विभिन्न श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधि रहे सक्रिय
हड़ताल को सफल बनाने के लिए श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधि पूरे दिन सक्रिय रहे। आंदोलन में मोर्चा संयोजक विंध्याचल बेदिया, संजीव कुमार बेदिया, राजू यादव, सोनाराम मांझी, सीताराम किस्कू, बच्चन पांडेय, खजांची राम, रामनरेश सिंह, देवेंद्र सिंह, संजय शर्मा, अर्जुन सिंह, बासुदेव साव, लालो महतो, महादेव बेसरा, कंचन मांझी, विश्वनाथ मांझी, संजय वर्मा, सुदेश प्रसाद, राजकुमार सिंह, गोपाल यादव, विनोद मिश्रा सहित दर्जनों कार्यकर्ता शामिल रहे।


