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आस्था विश्वास परंपरा और चमत्कार का संगम: बूढ़ा छत्तर धाम में महाशिवरात्रि पर उमड़ता जनसैलाब

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रजरप्पा। गोला प्रखंड मुख्यालय से लगभग चार किलोमीटर की दूरी पर रायपुरा गांव में स्थित बूढ़ा छत्तर धाम आज पूरे क्षेत्र में श्रद्धा, विश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बन चुका है। खुले आसमान के नीचे विराजमान विशाल, गोलाकार शिवलिंग यहां की प्रमुख पहचान है, जो भक्तों की अटूट आस्था का प्रतीक माना जाता है। विशेष रूप से महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर यह स्थल शिवभक्तों से खचाखच भर जाता है और पूरा इलाका ‘हर-हर महादेव’ के गगनभेदी नारों से गूंज उठता है।

खुले आकाश तले विराजमान शिव

इस धाम की सबसे विशिष्ट बात यह है कि यहां भगवान शिव किसी मंदिर की चारदीवारी में नहीं, बल्कि खुले आकाश के नीचे स्थापित हैं। जनश्रुति है कि वर्षों पूर्व मंदिर निर्माण का प्रयास किया गया था, परंतु हर बार किसी न किसी कारणवश वह संरचना ध्वस्त हो गई। ग्रामीण इसे भगवान की इच्छा मानते हैं। तभी से शिवलिंग खुले वातावरण में ही पूजित है, जो इस स्थान को अलौकिक स्वरूप प्रदान करता है।

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पौराणिक प्रसंगों से जुड़ी मान्यता

स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, रामगढ़ के तत्कालीन राजा कामाख्या नारायण सिंह के पूर्वज जब जगन्नाथपुरी की यात्रा पर जाते थे, तो इसी मार्ग से होकर गुजरते और बूढ़ा छत्तर में विश्राम करते थे। किंवदंती है कि एक अवसर पर रामगढ़ नरेश और कलिंग महाराज नील माधव ने यहां पूजा-अर्चना के उपरांत शिवलिंग को अपने साथ ले जाने का प्रयास किया, परंतु शिवलिंग मार्ग में ही पुनः मूल स्थान पर लौट आई। अनेक प्रयासों के बावजूद उसे हटाया नहीं जा सका। इसी क्रम में शिवलिंग आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुई और उससे दूध सदृश धारा प्रवाहित होने लगी। तभी से इसे स्वयंभू और चमत्कारी स्वरूप में पूजनीय माना जाता है।

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परंपराओं से सजी जीवंत आस्था

बूढ़ा छत्तर धाम से जुड़ी ग्रामीण परंपराएं आज भी पूरी श्रद्धा से निभाई जाती हैं। गांव में किसी गाय के बछड़े के जन्म पर पहला दूध यहां अर्पित करना अनिवार्य माना जाता है। परिसर में स्थापित काली स्वरूपिणी माता पार्वती को बकरे अथवा नारियल की बलि देने की परंपरा भी वर्षों से चली आ रही है, जिसे श्रद्धालु आज भी निभाते हैं।

महाशिवरात्रि महोत्सव इस वर्ष 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का भव्य आयोजन निर्धारित है। श्रद्धालु निर्जल व्रत रखकर भगवान शिव का अभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना करेंगे। दिनभर रुद्राभिषेक, मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम चलता रहेगा।रात्रि बेला में भक्ति जागरण और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आयोजन होगा। पूरी रात चलने वाला पारंपरिक छउ नृत्य इस महोत्सव का प्रमुख आकर्षण रहेगा, जो दर्शकों को आध्यात्मिक भाव में सराबोर कर देता है।

सामूहिक भोग और मंडा पर्व का शुभारंभ महाशिवरात्रि पर खीर भोग का सामूहिक आयोजन यहां की विशेष परंपरा है। गांव के प्रत्येक घर से दूध लाकर परिसर में ही खीर तैयार की जाती है और भगवान को अर्पित करने के बाद प्रसाद स्वरूप वितरित की जाती है। मान्यता है कि बूढ़ा छत्तर धाम में आयोजित इस महाशिवरात्रि महोत्सव के साथ ही क्षेत्र में मंडा पर्व की औपचारिक शुरुआत मानी जाती है, जिससे इस धाम का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। ग्रामीणों द्वारा आयोजन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। बूढ़ा छत्तर धाम न केवल श्रद्धा का केंद्र है, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक चेतना का जीवंत प्रतीक बन चुका है।

G. Reddy

जी रेड्डी एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो निष्पक्ष और सटीक रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। वे "समाचार संध्या" नामक वेब पोर्टल संचालित करते हैं, जो समसामयिक घटनाओं पर गहरी विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग करता है। उनका उद्देश्य समाज को सही और विश्वसनीय जानकारी प्रदान करना है।
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