डोनाल्ड ट्रंप पिछले नौ वर्षों में अमेरिका के पहले राष्ट्रपति के रूप में बीजिंग पहुंचे हैं.
यह दौरा तब हो रहा है, जब अमेरिका और भारत के संबंधों में बहुत गर्मजोशी नहीं है और अमेरिका ईरान के साथ जंग में फँसा हुआ है.
दूसरी तरफ़ चीन से भी भारत के रिश्तों में बहुत भरोसा नहीं है.
यह दौरा कई महीनों तक टैरिफ को लेकर चले तनाव, रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और तीखी बयानबाज़ी के बाद हुआ है. इसके बावजूद ट्रंप ने शी जिनपिंग को महान नेता और मित्र कहकर गर्मजोशी दिखाई.
इससे एक संदेश गया कि दुनिया की दो सबसे बड़ी शक्तियां अधिक स्थिर संबंधों की चाहत रखती हैं.
चीन और अमेरिका में गर्मजोशी को भारत के ख़िलाफ़ नहीं देख जा सकता लेकिन इसके असर को समझा जा सकता है.
भारत की कोशिश यही होती है कि वह चीन और अमेरिका में संतुलन बनाकर चले और ऐसा संदेश न जाए कि एक से रिश्ता दूसरे के ख़िलाफ़ है.
चीन और अमेरिका दोनों भारत के बड़े कारोबारी साझेदार हैं. कई मामलों में भारत की दोनों देशों पर निर्भरता भी है.


