रजरप्पा। सीसीएल रजरप्पा स्थित डीएवी पब्लिक स्कूल में 12 फरवरी 2026 को महान समाज सुधारक, दार्शनिक एवं आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती की जयंती श्रद्धा, भक्ति और उत्साहपूर्ण वातावरण में मनाई गई। कार्यक्रम का उद्देश्य उनके आदर्शों, शिक्षाओं तथा समाज के प्रति उनके अमूल्य योगदान को स्मरण करना था। कार्यक्रम का शुभारंभ कक्षा नवम् ‘ब’ के विद्यार्थियों द्वारा वैदिक रीति से हवन कर किया गया।
वेद मंत्रों के पावन उच्चारण से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित हो उठा। हवन के माध्यम से सत्य, अनुशासन, धर्म और वैदिक मूल्यों के महत्व कर रेखांकित किया गया। इस अवसर पर कक्षा नवम् ‘अ’ एवं ‘ब’ की छात्रा माधुरी तथा हिमानी उपाध्याय ने महर्षि दयानंद के जीवन एवं विचारों पर हिंदी तथा अंग्रेजी में प्रभावशाली भाषण प्रस्तुत कर सभी को प्रेरित किया।

इसके पश्चात महर्षि दयानंद के जीवन, उपदेशों और समाज सुधार संबंधी कार्यों पर आधारित एक भावपूर्ण भजन प्रस्तुत किया गया। धर्म शिक्षक सत्यकाम आर्य एवं संगीत शिक्षक रजनीश पाठक के सुमधुर स्वर तथा विद्यार्थियों की सहभागिता ने उपस्थित जनों को भाव-विभोर कर दिया।माननीय एआरओ-सह- प्राचार्य डॉ. एस. के. शर्मा ने शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के साथ महर्षि दयानंद सरस्वती के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
श्रद्धांजलि उपरांत महर्षि दयानंद के विचारों को जन-जन तक पहुँचाने हेतु एक भव्य शोभा यात्रा निकाली गई। कक्षा नवम् ‘अ’, ‘ब’ एवं ‘स’ के विद्यार्थियों ने तख्तियाँ और प्रेरणादायक नारों के साथ उत्साहपूर्वक भाग लिया। यह शोभा यात्रा विद्यालय परिसर से प्रारंभ होकर महाप्रबंधक कार्यालय, सीसीएल रजरप्पा क्षेत्र,पुलिस थाना, आवासीय कॉलोनियाँ, डीएवी जूनियर विंग, बाजार क्षेत्र एवं डाकघर होते हुए पुनः विद्यालय परिसर में संपन्न हुई।
समारोह के अंत में डॉ. एस. के. शर्मा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए महर्षि दयानंद के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया। उन्होंने सत्यनिष्ठा, सामाजिक सुधार, तर्कशील चिंतन तथा राष्ट्रसेवा जैसे मूल्यों को अपनाने पर विशेष बल दिया। पूरे कार्यक्रम का समापन गर्व, श्रद्धा एवं नव-संकल्प की भावना के साथ हुआ।
विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने महर्षि दयानंद के आदर्शों पर चलने तथा डीएवी संस्था की गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में सत्यकाम आर्य, रजनीश पाठक, खेल शिक्षक मनीष कुमार सिंह, सुश्री शुभलता,हरेंद्र कुमार सिंह तथा उमापति कुमार सहित समस्त शिक्षकों का सराहनीय योगदान रहा।


