रजरप्पा। 12.फ़रवरी को चूरचू स्वास्थ्य केंद्र मे यक्ष्मा प्रबंधक सफीन रेहान चर-चर प्रभारी अशोक राम बीपीएम विजय कुमार डॉक्टर सुचिता सहित कई चिकित्सक ने बीमारियों के बारे बताया बिमारी की विस्तृत जानकारी दी गई यक्ष्मा बीमारी के प्रमुख लक्षण लक्षण पर विस्तार रूप से चर्च की गईयक्ष्मा (टीबी/तुबेरक्यूलोसिस) माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस जीवाणु से होने वाला एक गंभीर संक्रामक रोग है, जो मुख्य रूप से फेफड़ों (पल्मोनरी टीबी) को प्रभावित करता है, लेकिन रीढ़, मस्तिष्क या गुर्दे में भी फैल सकता है।
यह खांसने या छींकने के माध्यम से हवा के द्वारा फैलता है, जिसके मुख्य लक्षण लंबे समय तक खांसी, बलगम में खून आना, सीने में दर्द और रात में पसीना आना है। यह उपचार योग्य है।
यक्ष्मा रोग के प्रमुख विवरण: संक्रमण और फैलाव: टीबी के कीटाणु हवा के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलते हैं।
टीबी के प्रकार: सक्रिय टीबी (एक्टिव TB): इसमें मरीज बीमार महसूस करता है और दूसरों को संक्रमित कर सकता है।
सुप्त टीबी (लटेंट TB): इसमें बैक्टीरिया शरीर में होते हैं लेकिन निष्क्रिय रहते हैं, लक्षण नहीं होते और यह संक्रामक नहीं होता।
लक्षण: 2-3 सप्ताह से अधिक समय तक खांसी, बलगम (कभी-कभी खून के साथ), सीने में दर्द, रात में पसीना आना, बुखार और वजन कम होना।
कारण: कमजोर इम्यून सिस्टम (जैसे HIV), कुपोषण, मधुमेह, और संक्रमित व्यक्ति के निकट संपर्क में रहना।
निदान और जांच: बलगम की जांच, छाती का एक्स-रे, त्वचा परीक्षण (मंटूक्स) और इगरा रक्त परीक्षण।
उपचार: टीबी का इलाज एंटीबायोटिक दवाओं (जैसे डॉट्स) के एक कोर्स द्वारा किया जाता है, जो आमतौर पर कम से कम 6 महीने तक चलता है इस मौके पर जिप सदस्य बासुदेव करमाली सांसद प्रतिनिधि मोहन हेमब्रम, बहेरा मुखिया देवकी महतो, पंसस आशा राय सहित सहिया ग्रामीण मौजूद थे।


