रोड सेल चालू करने, रोजगार, मुआवजा और मूलभूत सुविधाओं की मांग, एक सप्ताह में कार्रवाई नहीं होने पर उग्र आंदोलन की दी चेतावनी
भुरकुंडा (रामगढ़)। भुरकुंडा कोलियरी से प्रभावित विस्थापित एवं ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर विस्थापित प्रभावित संघर्ष समिति ने शुक्रवार को सीसीएल भुरकुंडा कोलियरी प्रबंधन एवं बी.एल.ए. आउटसोर्सिंग कंपनी को सात सूत्री मांग-पत्र सौंपा है। समिति ने जनहित एवं उद्योगहित में मांगों पर अविलंब कार्रवाई करने की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर सकारात्मक पहल नहीं की गई तो उग्र जन आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।
समिति ने मांग-पत्र में कहा है कि संगम खुली खदान परियोजना से उत्पादन होने वाले 75 प्रतिशत कोयले का आवंटन रोड सेल में किया जाए, ताकि स्थानीय ग्रामीणों एवं बेरोजगारों को रोजगार मिल सके। समिति ने आरोप लगाया कि भुरकुंडा कोलियरी रोड सेल पिछले लगभग चार वर्षों से बंद है, जिससे सैकड़ों ग्रामीण रोजगार से वंचित होकर पलायन को मजबूर हैं। इसलिए रोड सेल को अविलंब चालू करने की मांग की गई है।
मांग-पत्र में देवरिया, कुरसे, दुंदुवा और बलकुदरा राजस्व ग्राम के विस्थापित एवं प्रभावित रैयत परिवारों को चिन्हित कर नौकरी एवं मुआवजा देने की मांग की गई है। साथ ही संगम खुली खदान में कार्यरत आउटसोर्सिंग कंपनी बी.एल.ए. में स्थानीय ग्रामीणों और बेरोजगारों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार उपलब्ध कराने की बात कही गई है। समिति ने प्रभावित गांवों में सीसीएल प्रबंधन द्वारा मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने, निःशुल्क बिजली एवं पेयजल सुविधा देने की मांग भी उठाई है।
इसके अलावा डी.ए.वी. विद्यालयों में प्रभावित गांवों के छात्रों को प्राथमिकता के आधार पर नामांकन एवं रियायती दर पर शिक्षा उपलब्ध कराने तथा गरीब विद्यार्थियों को निःशुल्क शिक्षा देने की व्यवस्था करने की मांग की गई है। समिति ने यह भी मांग की है कि प्रभावित ग्रामीणों को वैकल्पिक रोजगार के साधन उपलब्ध कराए जाएं तथा कोलियरी क्षेत्र की खाली पड़ी भूमि एवं कंपनी आवासों का आवंटन स्थानीय रैयतों और ग्रामीणों को किया जाए।
इस संबंध में मांग-पत्र की प्रतिलिपि अनुमंडल पदाधिकारी रामगढ़, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी पतरातू, अंचलाधिकारी पतरातू, महाप्रबंधक सीसीएल बरका-सयाल क्षेत्र, थाना प्रभारी भुरकुंडा तथा बी.एल.ए. आउटसोर्सिंग कंपनी प्रबंधन को भी भेजी गई है। मांग-पत्र में रामदास बेदिया, कार्तिक मुंडा, संजय यादव, सुरेंद्र तुरी, जितेंद्र बेदिया, टिंकु प्रजापति, बुलेंद बेदिया आदि के हस्तारक्ष अंकित हैं।


