दो दिवसीय सम्मेलन में साहित्य, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर हो रहा मंथन
रिपोर्ट : कृष्णा करमाली।
चितरपुर (रामगढ़)। रजरप्पा स्थित सीसीएल के ऑफिसर्स क्लब में शनिवार से प्रगतिशील लेखक संघ (प्रलेस), झारखंड के दो दिवसीय पाँचवें राज्य सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। सम्मेलन की शुरुआत स्वतंत्रता, समता और सृजन की प्रतिबद्धता के प्रतीक के रूप में प्रलेस के झंडोत्तोलन के साथ हुई। सम्मेलन में प्रलेस के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. सुखदेव सिंह सिरसा मुख्य रूप से उपस्थित रहे। उद्घाटन सत्र की शुरुआत इप्टा के कलाकारों ने शैलेंद्र का प्रसिद्ध गीत “तू ज़िंदा है तो ज़िंदगी की जीत पर यकीन कर” प्रस्तुत कर की।

खोरठा के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. बीएन ओहदार ने स्वागत भाषण दिया, जबकि इप्टा की राज्य महासचिव अर्पिता ने साहित्यिक एवं सांस्कृतिक आंदोलनों में महिलाओं तथा हाशिए के समाज की बराबर भागीदारी सुनिश्चित करने पर बल दिया। वक्ताओं ने लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक मूल्यों की रक्षा, सामाजिक न्याय तथा जनपक्षधर और प्रगतिशील लेखन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। डॉ. सुखदेव सिंह सिरसा ने कहा कि प्रलेस के 90 वर्ष केवल उत्सव का विषय नहीं हैं, बल्कि यह उपलब्धियों, चुनौतियों और आत्ममंथन का भी अवसर है।

प्रख्यात कथाकार रणेंद्र ने कहा कि प्रगतिशील विचारधारा का प्रभाव केवल हिंदी ही नहीं, बल्कि अन्य भारतीय भाषाओं और शास्त्रीय संगीत में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। प्रो. अहमद बद्र ने गंभीर और जनपक्षधर साहित्य की आवश्यकता पर जोर दिया, जबकि प्रो. रामानंदन सिंह ने लेखकों से सृजन और संगठन को मजबूत बनाने का आह्वान किया। उद्घाटन सत्र में शैलेन्द्र, प्रो. अहमद बद्र, पंकज मित्र, रणेंद्र, अनीस अंकुर, गुंजल मुंडा सहित कई साहित्यकारों ने अपने विचार रखे।
सत्र का संचालन राज्य महासचिव मिथिलेश ने किया, जबकि आयोजन समिति के सचिव पॉवेल कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित किया। दूसरे सत्र में “पुरखे रचनाकार” विषय पर चर्चा हुई। इस दौरान विद्रोही कवि सुकांत भट्टाचार्य, विजयदान देथा, महाश्वेता देवी, अमरकांत और डॉ. नामवर सिंह के साहित्यिक योगदान पर कमल, पार्थ बनर्जी एवं डॉ. प्रज्ञा गुप्ता ने अपने विचार प्रस्तुत किए।
सत्र की अध्यक्षता नियाज़ अख्तर, निशि प्रभा और रणेंद्र ने की तथा संचालन संजय सोलोमन ने किया। शाम को रायपुर से आए इप्टा के वरिष्ठ रंगकर्मी एवं नाचा थिएटर विशेषज्ञ निसार अली और उनकी टीम ने प्रभावशाली नाट्य प्रस्तुति देकर दर्शकों की खूब सराहना बटोरी। सम्मेलन के दूसरे दिन वैचारिक सत्रों, युवा रचनाकारों के कविता पाठ और साहित्यिक विमर्श के साथ झारखंड के प्रगतिशील साहित्यिक आंदोलन को नई दिशा देने पर चर्चा होगी।