रीड-ए-थॉन में बच्चों के साथ शिक्षक, अभिभावक और समुदाय ने भी बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा
रिपोर्ट एस कुमार
रामगढ़। झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद रांची के निर्देशानुसार राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी2026) 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप बच्चों में बुनियादी पठन कौशल विकसित करने और उनमें नियमित रूप से पढ़ने की आदत को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित ‘मेरा शब्द, मेरी कहानी’ पठन अभियान के तहत मंगलवार को जिले के सभी सरकारी विद्यालयों में रीड-ए-थॉन गतिविधि का आयोजन किया गया। राज्यभर में यह पठन अभियान 15 अगस्त 2026 से 18 सितंबर 2026 तक संचालित किया जा रहा है।
इसी क्रम में 08 सितंबर को जिले केविभिन्न विद्यालयों में आयोजित रीड-ए-थॉन में विद्यार्थियों के साथ शिक्षक, अभिभावक एवं समुदाय के सदस्यों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की। निर्धारित समय प्रातः 11 बजे से 11:30 बजे तक प्रतिभागियों ने बाल साहित्य की पुस्तकों का सामूहिक पठन किया। इस पहल का उद्देश्य बच्चों में केवल पढ़ने की आदत विकसित करना ही नहीं, बल्कि उन्हें पढ़ने, समझने, सोचने और अपनी बात अपने शब्दों में व्यक्त करने के लिए सक्षम बनाना है।
बाल वाटिका से कक्षा 12 तक के विद्यार्थियों को अभियान से जोड़ते हुए उनकी पठन समझ, भाषा कौशल, रचनात्मकता, कल्पनाशीलता और अभिव्यक्ति क्षमता को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। अभियान के दौरान विद्यालयों में ज़ोर से पढ़ें, शेयर्ड रीडिंग, वर्ड स्टोरी क्रिएशन, हमारी कहानी हमारे शब्दों में, कहानियों की दुनिया, क्यूआर कोड स्टोरी वॉल्स और स्टूडेंट पॉडकास्ट जैसी विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
इनमें रीड-ए-थॉन को विशेष महत्व दिया गया है, जिसके माध्यम से बच्चों को सामूहिक रूप से पुस्तक पढ़ने और पठन को बोझ के बजाय आनंददायक गतिविधि के रूप में अपनाने का अवसर मिल रहा है। अभियान के तहत विद्यार्थियों को अपनी पसंद की पुस्तक चुनकर पढ़ने तथा पढ़ी गई कहानी अथवा विषय-वस्तु को अपने शब्दों में प्रस्तुत करने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। इससे उनमें नियमित पठन की आदत के साथ-साथ भाषा, संचार एवं अभिव्यक्ति कौशल का विकास होगा।
जिला शिक्षा अधीक्षक खुशबू कुमारी ने बताया कि जिले के कक्षा 1 से 12 तक के सभी सरकारी विद्यालयों को अभियान के तहत निर्धारित गतिविधियों का समयबद्ध,प्रभावी एवं सहभागितापूर्ण तरीके से संचालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने कहा कि बच्चों में पढ़ने की आदत को उनके दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए विद्यालय स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभियान की सफलता के लिए शिक्षकों, विद्यार्थियों, अभिभावकों एवं समुदाय की सक्रिय सहभागिता बेहद महत्वपूर्ण है।
इसके माध्यम से विद्यालयों में विकसित हो रही पठन संस्कृति को बच्चों के घर और समुदाय तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। ‘मेरा शब्द, मेरी कहानी’ अभियान बच्चों को किताबों से जोड़ने के साथ उन्हें अपनी कल्पना को उड़ान देने, नई बातें सीखने और आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखने का अवसर प्रदान कर रहा है। यह पहल जिले में एक मजबूत और आनंदमय पठन संस्कृति विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।
