रिपोर्ट : कृष्णा करमाली।
चितरपुर (रामगढ़)। डॉ. एस. राधाकृष्णन शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय, लारी सुकरीगढ़ा (रामगढ़) एवं दौलत महतो मेमोरियल टीचर ट्रेनिंग कॉलेज, बनासो (विष्णुगढ़) के बीच शुक्रवार को संकाय एवं छात्र विनिमय कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य दोनों शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों के प्रशिक्षकों एवं प्रशिक्षुओं के बीच शैक्षणिक, सांस्कृतिक तथा व्यावहारिक अनुभवों का आदान-प्रदान कर शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाओं को और अधिक समृद्ध बनाना था।
कार्यक्रम के तहत दोनों महाविद्यालयों के प्रशिक्षकों एवं प्रशिक्षुओं ने एक-दूसरे के शैक्षणिक वातावरण, कार्यप्रणाली एवं व्यवहारिक गतिविधियों का अवलोकन किया। इस दौरान आर्ट लैब, साइंस लैब, म्यूजिक लैब, जियोग्राफी लैब, मैथ लैब तथा आर्ट एंड क्राफ्ट लैब सहित विभिन्न प्रयोगशालाओं का भ्रमण कराया गया। प्रतिभागियों ने प्रयोगशालाओं में उपलब्ध संसाधनों, शिक्षण-अधिगम सामग्री एवं उनके प्रभावी उपयोग से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त कीं।
दौलत महतो मेमोरियल टीचर ट्रेनिंग कॉलेज के प्रशिक्षुओं द्वारा डॉ. एस. राधाकृष्णन शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय के प्रतिनिधि शिक्षकों एवं छात्रों का तालियों की गड़गड़ाहट और पुष्पगुच्छ भेंट कर आत्मीय स्वागत किया गया। इसके पश्चात डॉ. एस. राधाकृष्णन शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सुशील कुमार उपाध्याय के मार्गदर्शन में सभी प्रशिक्षुओं ने महाविद्यालय का भ्रमण किया। कार्यक्रम में प्रतिनिधि के रूप में प्राचार्य डॉ. सुशील कुमार उपाध्याय, व्याख्याता एवं आईक्यूएसी समन्वयक बाबूचंद प्रसाद, सहायक प्राध्यापक नयन कुमार मिश्रा, मोहम्मद परवेज अख्तर सहित महाविद्यालय के सभी प्रशिक्षु उपस्थित रहे।
दोनों संस्थानों के प्रतिनिधियों ने शैक्षणिक गतिविधियों, प्रयोगशालाओं एवं शिक्षण-अधिगम की प्रक्रियाओं का अवलोकन कर अपने अनुभव साझा किए। इस अवसर पर दौलत महतो मेमोरियल टीचर ट्रेनिंग कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुनील कुमार चतुर्वेदी तथा डॉ. एस. राधाकृष्णन शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सुशील कुमार उपाध्याय ने कहा कि इस प्रकार के संकाय एवं छात्र विनिमय कार्यक्रम शिक्षक शिक्षा के क्षेत्र में अत्यंत उपयोगी एवं सार्थक सिद्ध होंगे।
उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से प्रशिक्षकों एवं प्रशिक्षुओं को एक-दूसरे के अनुभवों, नवाचारों तथा बेहतर शिक्षण पद्धतियों को जानने और सीखने का अवसर मिलता है, जिससे दोनों संस्थानों के बीच शैक्षणिक संबंध और अधिक सुदृढ़ होते हैं। कार्यक्रम के अंत में दोनों महाविद्यालयों के प्रतिनिधियों ने एक-दूसरे के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी इस प्रकार के शैक्षणिक एवं विनिमय कार्यक्रमों को निरंतर जारी रखने की अपेक्षा व्यक्त की।