रिपोर्ट सज्जाद आरिफ
दुलमी । जनगणना 2027 को लेकर आदिवासियों में काफी उत्सुकता बढ़ गई है। सरना कोड लागू करने को लेकर आदिवासी समाज एकजुट हो रहा है। यह बातें राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा रामगढ़ तत्वाधान में आयोजित प्रथम सरना सरना झंडा गड़ी कार्यक्रम में प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश पहान बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को पिछले कई दशकों से दिग्भ्रमित किया गया है और इस समाज को सनातन धर्म में जानबूझकर सम्मिलित किया गया। ताकि आदिवासी समाज अपनी पहचान खो जाए। आदिवासी समाज मूल रूप से सरना धर्म से संबंधित है। जागरूकता केअभाव में यह समाज भी खुद को सनातन प्रेमी ही मानता रहा है।
लेकिन लोग आप जागरूक हो रहे हैं और अपनी जड़ों को पहचानना शुरू कर दिया है।आदिवासी समाज सनातन धर्म से भिन्न है। हमारी पूजा पद्धति, खान पान, वेशभूषा और परंपरा आस्था सब अलग है। इस बार आदिवासियों ने संकल्प लिया है कि आने वाले 2027 जनगणना में आदिवासी समाज धर्म के कॉलम में सनातन के स्थान पर सरना धर्म लिखेंगे और दो करोड़ से अधिक लोग इस कॉलम को पूरा करेंगे।
ताकि सरकार भी सरना कोड लागू कर सके। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज जल, जंगल , जमीन की रक्षा करने के लिए कटिबंध है। लेकिन इनके संरक्षण के लिए कोई ठोस नीति नहीं है। इस पर भी आदिवासी समाज गंभीरता के साथ विचार कर रही है। कार्यक्रम की अध्यक्षता अजय मुंडा व संचालन नरेश मुंडा ने किया। इस से पूर्व अतिथियों के आगमन पर उन्हें पारंपरिक रूप से सखुआ पत्ते की टोपी और सखुआ पत्ते की माला पहनकर स्वागत किया गया।
तत्पश्चात पगड़ी पहनकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर किया गया। इसके बाद सरना स्थल पर विधिवत पूजा अर्चना कर सुख, समृद्धि, शांति,खुशहाली और एकता की कामना की गई। इसके बाद पारंपरिक रूप से लोकगीतों के धुन पर घण्टों आदिवासी समाज नाश्ते और घूमते रहे। कार्यक्रम के अंत में प्रसाद का वितरण एवं शांति बिनती किया गया।। मौके पर उर्मिला मुंडा, सुशीला मुंडा, लगन मुंडा, पिंकी मुंडा, शिशु मुंडा सहित आयोजन समिति के दर्जनों लोग उपस्थित थे।