नॉर्वे में भारतीय विदेश मंत्रालय की प्रेस कॉन्फ़्रेंस में एक पत्रकार और मंत्रालय के प्रवक्ता के बीच तीखी नोकझोंक देखी गई.
इससे पहले नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास स्टोर से मुलाक़ात के बाद जब पीएम नरेंद्र मोदी से नॉर्वे की एक पत्रकार ने सवाल पूछा तो पीएम बिना जवाब देते हुए वहां से जाते नज़र आए. दोनों ही घटनाओं की भारत में काफ़ी चर्चा हो रही है.
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और तृणमूल कांग्रेस की नेता महुआ मोइत्रा समेत कई लोगों ने इस पर रिएक्शन दिए हैं.
प्रेस कॉन्फ़्रेंस में नॉर्वे की एक पत्रकार ने भारतीय विदेश मंत्रालय से देश में ‘मानवाधिकारों के उल्लंघन’ के आरोप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मुश्किल सवालों का सामना ना करने’ से जुड़ा सवाल पूछा.
भारतीय विदेश मंत्रालय ने इसके जवाब में भारत को ‘एक महान देश’ और ‘प्राचीन सभ्यता वाला देश’ बताया और कहा कि कोविड महामारी के दौरान भारत ने ‘कई देशों को वैक्सीन दी’ और इस तरह के कई कामों की वजह से ‘पूरी दुनिया भारत पर भरोसा करती है.’
क्या था मामला

ओस्लो में भारतीय विदेश मंत्रालय की प्रेस कॉन्फ़्रेंस में नॉर्वे की एक पत्रकार ने सवाल पूछा, ‘भारत और नॉर्वे एक दूसरे के साथ मज़बूत साझेदारी कर रहे हैं. लेकिन हम आप पर भरोसा क्यों करें? क्या आप वादा करते हैं कि अपने देश में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघन को रोकेंगे. आपके प्रधानमंत्री मुश्किल सवालों का जवाब देना कब शुरू करेंगे.”
जब विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि हमने आपका सवाल सुन लिया है और इसका जवाब देंगे तो नॉर्वे की उस पत्रकार ने कहा कि मुझे इसका जवाब फ़ौरन चाहिए.
बाद में उसी प्रेस कॉन्फ़्रेंस में भारत के विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सीबी जॉर्ज ने इस सवाल के जवाब में कहा, “भारत बेहद प्राचीन सभ्यता है. क़रीब पांच हजार साल पुरानी सभ्यता. हमने ज़ीरो का आविष्कार किया. हमने योगा का आविष्कार किया.”


