‘बालेश्वर पटेल की हत्या से समाज ने शिक्षा और मानवाधिकार का एक सजग प्रहरी खो दिया’
रिपोर्ट एस कुमार
गिद्दी/सिरका। रबोध निवासी एवं गिरिडीह जिला में सब-रजिस्ट्रार के पद पर कार्यरत बालेश्वर पटेल की हत्या को मानवाधिकार के मानद प्रोफेसर (भारतीय मानवाधिकार संस्थान, नई दिल्ली) डॉ. लालदीप गोप ने जघन्यतम अपराध बताया है। उन्होंने कहा कि बालेश्वर पटेल की पहचान सिर्फ डाड़ी प्रखंड ही नहीं, बल्कि पूरे जिले में शिक्षा के आदर्श प्रतिमान के रूप में थी। डॉ. गोप ने बताया कि बालेश्वर पटेल ने अत्यंत कठिन परिस्थितियों में उच्च शिक्षा प्राप्त की थी।
उन्होंने सत कोलंबस कॉलेज, हजारीबाग से रसायन विज्ञान (एमएससी) की डिग्री हासिल की थी। वे दो बार यूपीएससी की मुख्य परीक्षा (मेंस) उत्तीर्ण कर चुके थे तथा भारतीय मानवाधिकार संस्थान, नई दिल्ली से मानवाधिकार में पीजी डिप्लोमा भी किया था। उन्होंने कहा कि बालेश्वर पटेल ने अपने जीवन की शुरुआत पारा शिक्षक के रूप में की और बाद में झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षा उत्तीर्ण कर सब-रजिस्ट्रार के पद पर चयनित हुए।
अंतिम समय तक वे इसी पद पर कार्यरत रहे। शिक्षा, सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में उनकी सक्रिय भूमिका रही। डॉ. गोप ने कहा कि समाज में बढ़ती हिंसक प्रवृत्तियों का शिकार होकर बालेश्वर पटेल की जिस प्रकार निर्मम हत्या हुई, वह मध्ययुगीन बर्बरता की याद दिलाती है। मानवाधिकारों के प्रति सदैव सजग रहने वाले एक संवेदनशील व्यक्ति की इस तरह हत्या होना अत्यंत दुखद और चिंताजनक है।
उन्होंने कहा कि इस घटना से समाज ने न केवल शिक्षा के एक आदर्श व्यक्तित्व को खोया है, बल्कि मानवाधिकारों के एक सजग प्रहरी और बुलंद आवाज को भी खो दिया है। उन्होंने राज्य मानवाधिकार आयोग से मामले में तत्काल संज्ञान लेने, निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने तथा दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।