96वीं जयंती पर ओ.पी. जिंदल के राष्ट्र निर्माण में योगदान को किया गया याद, युवाओं को उनके जीवन-दर्शन से प्रेरणा लेने का आह्वान
भुरकुंडा (रामगढ़)। राष्ट्र निर्माण के महान शिल्पी एवं दूरदर्शी उद्योगपति स्वर्गीय श्री ओम प्रकाश (ओ.पी.) जिंदल की 96वीं जयंती पर शुक्रवार को उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी जाएगी। इस अवसर पर उनके उद्योग, शिक्षा, सेवा और राष्ट्रहित के प्रति समर्पित जीवन-दर्शन को याद करते हुए कहा गया कि उन्होंने उद्योग को केवल व्यापार नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा का सशक्त माध्यम बनाया। हरियाणा के हिसार जिले के नलवा गांव के एक साधारण किसान परिवार से निकलकर ओ.पी. जिंदल ने अपने दृढ़ संकल्प, अथक परिश्रम और दूरदर्शी सोच के बल पर ऐसा औद्योगिक साम्राज्य खड़ा किया,
जिसने देश के इस्पात, ऊर्जा, अवसंरचना और विनिर्माण क्षेत्र को नई दिशा दी। उनके द्वारा स्थापित मूल्यों—ईमानदारी, गुणवत्ता, नवाचार और राष्ट्रहित—की प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है। ओ.पी. जिंदल का मानना था कि मजबूत उद्योग ही किसी भी राष्ट्र की आर्थिक शक्ति का आधार होते हैं। रोजगार सृजन, आत्मनिर्भरता और सामाजिक विकास के लिए उद्योगों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। आज ‘मेक इन इंडिया’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत-2047’ के संकल्पों के बीच उनके विचार पहले से अधिक प्रासंगिक दिखाई देते हैं। श्री जिंदल शिक्षा को राष्ट्र के भविष्य की सबसे बड़ी शक्ति मानते थे।
उनके अनुसार शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि नेतृत्व, नैतिकता, संवेदनशीलता और वैश्विक दृष्टिकोण विकसित करने का आधार है। उनकी प्रेरणा से स्थापित शैक्षणिक संस्थान आज हजारों युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर भविष्य की दिशा प्रदान कर रहे हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण विकास, कौशल विकास, खेल और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में उनके द्वारा शुरू की गई पहल आज भी समाज को लाभ पहुंचा रही हैं।
उनके लिए विकास तभी सार्थक था, जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। इस अवसर पर युवाओं से ओ.पी. जिंदल के जीवन से प्रेरणा लेकर बड़े सपने देखने, कड़ी मेहनत, ईमानदारी और राष्ट्र सेवा की भावना के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया गया। श्री जिंदल की अमर विरासत उद्योग, शिक्षा और सेवा के समन्वय पर आधारित है, जो विकसित, आत्मनिर्भर और समावेशी भारत के निर्माण की मजबूत नींव है।
