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संघर्ष से सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की प्रेरक कहानी : सुनीता देवी

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रिपोर्ट आरिफ कुरैशी

रामगढ़। झारखण्ड राज्य के रामगढ़ जिले के रामगढ प्रखंड अंतर्गत बारलोंग गांव की सुनीता देवी (पति-मुकेश कुमार महतो) कुछ साल पहले तक उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय थी। सुनीता के पति, मुकेश कुमार महतो, पेशे से एक गाड़ी चालक हैं और उनकी सीमित कमाई पर ही पूरे घर का निर्भर था। परिवार में तीन बच्चे हैं-बड़ा बेटा 20 साल का, छोटा बेटा 10 साल का और बेटी 15 साल की है। बढ़ती महंगाई के इस दौर में एक व्यक्ति की मामूली आय से पांच लोगों के परिवार का भरण-पोषण करना लोहे के चने चबाने जैसा था।

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बच्चों की पढ़ाई-लिखाई, स्वास्थ्य और घर की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना एक बड़ी चुनौती बनी हुई थी। कई बार तो ऐसा लगता था मानो जीवन का हर दिन एक नया और अंतहीन संघर्ष लेकर आया हो। अंधकार और अभाव के इस दौर में सुनीता के जीवन में बदलाव की एक सकारात्मक किरण तब नजर आई, जब उन्हें झारखण्ड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) के बारे में पता चला।

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अपने परिवार के भविष्य को संवारने की चाह में, अगस्त 2022 में सुनीता ने गाँव में हीं दिनांक 12-09-2022 को गठित “गंगा आजीविका महिला समूह” से जुड़ने का एक साहसिक फैसला किया। शुरुआत में उनके मन में कई सवाल थे, लेकिन समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने नियमित रूप से छोटी-छोटी बचत करना शुरू कर दिया। सप्ताह में मात्र 10 रुपये की बचत ने उनके जीवन में एक नई और बड़ी आशा का प्रतीक बन गई।

समूह की नियमित बैठकों ने सुनीता की सोच और समझ का दायरा पूरी तरह से बदल दिया। इन बैठकों में महिलाओं को केवल बचत करना ही नहीं सिखाया जाता था, बल्कि वित्तीय अनुशासन, पैसों के सही प्रबंधन और छोटे व्यवसाय को शुरू करने की महत्वपूर्ण जानकारियां भी दी जाती थीं। अन्य महिलाओं को आगे बढ़ते देख सुनीता के भीतर का सोया हुआ आत्मविश्वास जाग उठा।

समूह के सदस्यों के मार्गदर्शन और प्रोत्साहन ने उन्हें यह विश्वास दिलाया कि अगर सही दिशा में मेहनत की जाए, तो गरीबी के इस जाल से बाहर निकला जा सकता है। अपने इसी आत्मविश्वास और समूह के मजबूत सहयोग से सुनीता ने एक बड़ा कदम उठाया। उन्होंने समूह के माध्यम से बैंक लिंकेज (सीसीएल) लोन के तहत ₹50,000 की ऋण राशि प्राप्त की। गाँव की भौगोलिक स्थिति और महिलाओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सुनीता ने एक समझदारी भरा निर्णय लिया। उन्होंने इस पूंजी से गाँव में ही अपना एक ‘श्रृंगार स्टोर’ (सौंदर्य व सजावट के सामान की दुकान) खोल लिया।

इससे पहले गाँव की महिलाओं और युवतियों को सजने-संवरने या सौंदर्य प्रसाधन का सामान खरीदने के लिए 7 किलोमीटर दूर शहर जाना पड़ता था। सुनीता की दुकान ने गाँव वालों की इस बड़ी समस्या का हमेशा के लिए समाधान कर दिया। सुनीता का यह व्यवसाय गाँव में ही अच्छी गुणवत्ता का सामान मिलने से उनकी दुकान पर ग्राहकों की भीड़ बढ़ने लगी। उनकी मेहनत और लगन रंग लाई और आज उनके इस व्यापार से होने वाली मासिक आमदनी लगभग ₹8,000 तक पहुँच गई है। इनका सलाना आय लगभग 100000 रुपये तक होने लगी।

इस छोटे लेकिन बेहद सफल व्यवसाय ने सुनीता के परिवार की आर्थिक स्थिति की पूरी तस्वीर ही बदल कर रख दी। अब बच्चों की पढ़ाई-लिखाई बिना किसी रुकावट के हो रही है, घर की सभी जरूरतें आसानी से पूरी हो रही हैं, और सबसे बड़ी बात, सुनीता खुद एक आत्मनिर्भर और सशक्त महिला बन गई हैं। सुनीता की यह यात्रा केवल उनके परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे गाँव के लिए एक बड़ी सीख है।

उन्होंने यह साबित कर दिया है कि समूह में जुड़कर नियमित की गई छोटी-छोटी बचत भी एक दिन बड़ा परिवर्तन ला सकती है। आज सुनीता देवी न केवल अपने परिवार की एक मजबूत रीढ़ बन गयी हैं, बल्कि गाँव की अन्य महिलाओं के लिए भी एक जीती-जागती प्रेरणा हैं। उनकी कहानी यह दर्शाती है कि सच्ची लगन, सही मार्गदर्शन और अदम्य साहस से जीवन की किसी भी कठिन परिस्थिति को बदला जा सकता है। आत्मनिर्भरता केवल एक परिवार को नहीं, बल्कि पूरे समाज को फायदा पहुँचाती है।

G. Reddy

जी रेड्डी एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो निष्पक्ष और सटीक रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। वे "समाचार संध्या" नामक वेब पोर्टल संचालित करते हैं, जो समसामयिक घटनाओं पर गहरी विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग करता है। उनका उद्देश्य समाज को सही और विश्वसनीय जानकारी प्रदान करना है।
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