बॉलीवुड में इन दिनों एक ऐसा बवाल मचा हुआ है जिसने पूरी इंडस्ट्री को हिलाकर रख दिया है। एक्टर रणवीर सिंह और फिल्म ‘डॉन 3’ के बीच का विवाद अब उस मोड़ पर आ गया है जहां फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज यानी FWICE ने खुलकर कह दिया – उनके चार लाख से ज्यादा सदस्य रणवीर सिंह के साथ काम नहीं करेंगे। सुनने में यह बड़ा करियर-एंडिंग कदम लगता है, लेकिन असलियत थोड़ी अलग और थोड़ी जटिल है।
पहले समझें, हुआ क्या था?
तीन साल से ‘डॉन 3’ की तैयारियां चल रही थीं। फरहान अख्तर की कंपनी एक्सेल एंटरटेनमेंट ने पूरा प्री-प्रोडक्शन रणवीर सिंह को ध्यान में रखकर किया था। शूटिंग की योजना बन चुकी थी, यूनिट रवाना होने ही वाली थी – और तभी रणवीर ने अचानक फिल्म छोड़ने का फैसला कर लिया। इससे न सिर्फ निर्माताओं को झटका लगा बल्कि सैकड़ों तकनीशियन और वर्कर्स भी प्रभावित हुए जिनका काम और कमाई इस प्रोजेक्ट से जुड़ी थी। एक्सेल एंटरटेनमेंट ने रणवीर से प्री-प्रोडक्शन के नुकसान के एवज में 45 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की है।
FWICE का यह ‘बैन’ आखिर है क्या?
शहर और स्थानीय मार्गदर्शिकासबसे पहले यह साफ कर लेना जरूरी है कि यह कोई सरकारी बैन नहीं है। न ही इसका कोई कानूनी आधार है जो रणवीर सिंह को फिल्में साइन करने से रोके। FWICE ने जो जारी किया है उसे ‘नॉन-कोऑपरेशन डायरेक्टिव’ कहते हैं – यानी असहयोग का आदेश।