राष्ट्रीय कवि संगम का प्रांतीय अधिवेशन संपन्न, साहित्य के माध्यम से राष्ट्र चेतना का दिया संदेश
झारखंड के 11 जिलों से पहुंचे 55 कवियों ने लिया हिस्सा, नई प्रांतीय कार्यकारिणी की घोषणा,
भुरकुंडा (रामगढ़)। राष्ट्रीय कवि संगम झारखंड प्रांत का प्रांतीय कार्यकारिणी अधिवेशन शुक्रवार की रात्रि रामगढ़ स्थित होटल शिवम इन में संपन्न हुआ। अधिवेशन में झारखंड के रांची, रामगढ़, बोकारो, हजारीबाग, गढ़वा, पलामू, चतरा, दुमका, देवघर, सिमडेगा और लातेहार सहित 11 जिलों से आए 55 कवियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में साहित्य, राष्ट्रहित, सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण तथा संगठन के विस्तार को लेकर व्यापक चर्चा हुई।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय कवि संगम के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगदीश मित्तल (बाबूजी) थे। विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रांतीय अध्यक्ष विजय मेवाड़, प्रांतीय महामंत्री सरोज झा श्झारखंडीश्, संगठन मंत्री श्याम कुंवर भारती तथा चंद्रिका ठाकुर श्देशदीपश् उपस्थित रहे। अधिवेशन का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ। इसके बाद कवयित्री संध्या ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की तथा प्रांतीय महामंत्री सरोज झा झारखंडी ने कार्यक्रम की रूपरेखा और उद्देश्य पर प्रकाश डाला। अधिवेशन के दौरान सभी पदाधिकारियों एवं सदस्यों का परिचय कराया गया।
सुझाव सत्र में विभिन्न जिलों से आए कवियों ने राष्ट्रीय कवि संगम को झारखंड के प्रत्येक पंचायत स्तर तक पहुंचाने, युवा रचनाकारों को मंच उपलब्ध कराने तथा गांव-गांव तक साहित्यिक गतिविधियों का विस्तार करने का प्रस्ताव रखा। अपने संबोधन में प्रांतीय अध्यक्ष विजय मेवाड़ ने कहा कि राष्ट्रीय कवि संगम केवल एक साहित्यिक संगठन नहीं, बल्कि राष्ट्र चेतना और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण का सशक्त अभियान है। यह मंच साहित्यकारों को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करता है। राष्ट्रीय अध्यक्ष जगदीश मित्तल ने कहा कि आप सभी मां सरस्वती के वरदपुत्र हैं।
आपकी लेखनी समाज और राष्ट्र को दिशा देने की क्षमता रखती है। ऐसा लिखिए, जो देश, धर्म और समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बने। उन्होंने कहा कि सच्ची साहित्य सेवा वही है, जो जनमानस में सकारात्मक परिवर्तन लाए। उन्होंने जीवन में विनम्रता, सेवा भावना और आत्मशक्ति के महत्व पर भी प्रकाश डालते हुए समाजहित में अपनी प्रतिभा का उपयोग करने का आह्वान किया। अधिवेशन के प्रथम सत्र में झारखंड प्रांत की नई कार्यकारिणी की घोषणा की गई।
इसमें महावीर प्रसाद रूंगटा एवं सुनील खवाड़े को संरक्षक, विजय मेवाड़ को प्रांतीय अध्यक्ष, जेपी अग्रवाल, चंद्रिका ठाकुर देशदीप एवं मोना बग्गा को प्रांतीय उपाध्यक्ष, सरोज झा झारखंडी को महामंत्री, राकेश नाजुक को कोषाध्यक्ष, श्याम कुंवर भारती, चंदन प्रजापति, आशीष दुबे एवं उत्तम लयकार को संगठन मंत्री तथा अंजनी कुमार दुबे कविगुरु को विशेष दायित्व सौंपा गया। वहीं उत्तम सिन्हा और जीवन कुमार को मीडिया प्रभारी बनाया गया।
अधिवेशन के दूसरे सत्र में विभिन्न जिलों से आए कवियों ने अपनी ओजस्वी, राष्ट्रभक्ति एवं सामाजिक सरोकारों से जुड़ी रचनाओं का पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। समापन अवसर पर सभी अतिथियों एवं प्रतिभागी कवियों को अंगवस्त्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में राकेश नाजुक, सुदीप अग्रवाल, अमित कुमार, विक्रांत गुप्ता, किशन आनंद, शंकर अग्रवाल, हिमांशु सहित राष्ट्रीय कवि संगम, झारखंड प्रांत के पदाधिकारियों एवं स्थानीय आयोजन समिति के सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।