चार गांवों के विस्थापितों का आंदोलन तेज, मांगें पूरी होने तक काम बंद रखने की चेतावनी
भुरकुंडा (रामगढ़)। पतरातु विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (पीवीयूएनएल) प्रबंधन द्वारा बार-बार दिए गए आश्वासनों के बावजूद मांगों पर कार्रवाई नहीं होने से प्रभावित चार गांवों बलकूदरा, जयनगर, रसदा एवं गेगदा के विस्थापितों का आक्रोश बुधवार को खुलकर सामने आया। नाराज ग्रामीणों ने छाई डैम पर बन रहे ऐश माउंट का निर्माण कार्य पूरी तरह बंद करा दिया और स्पष्ट चेतावनी दी कि जब तक उनकी जायज मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने 10 जून 2026 से कार्यबंदी की घोषणा की थी।
इसके एक दिन पहले 9 जून 2026 को पीवीयूएनएल प्रबंधन ने तीनों पंचायतों के मुखिया एवं ग्रामीणों के साथ आपात बैठक कर डेढ़ महीने के भीतर सभी प्रमुख मांगों का समाधान करने का लिखित एवं मौखिक आश्वासन दिया था। प्रबंधन के भरोसे पर ग्रामीणों ने अपना आंदोलन स्थगित कर दिया था। ग्रामीणों का आरोप है कि दो महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी न तो मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई हुई और न ही कोई संतोषजनक पहल की गई।
इससे आक्रोशित होकर उन्हें दोबारा निर्माण कार्य बंद कराने का निर्णय लेना पड़ा। ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में स्थानीय बेरोजगारों को 60 वर्ष तक की सेवा अवधि के साथ स्थायी रोजगार एवं नियुक्ति पत्र दिया जाए। छाई डैम से प्रभावित रैयतों की धान की फसल के नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाए। डूब क्षेत्र अथवा छाई डैम के अंदर बसे परिवारों के लिए स्थायी एवं बेहतर पुनर्वास की व्यवस्था की जाए।
रामगढ़ उपायुक्त के निर्देशानुसार पीवीयूएनएल की विस्थापित नीति एवं नियमावली में मौजूद त्रुटियों को तत्काल दूर कर संशोधित किया जाए। आंदोलनकारी ग्रामीणों ने क्षेत्रीय विधायक रोशन लाल चौधरी एवं सांसद मनीष जायसवाल से मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। ग्रामीणों का कहना है कि छाई डैम एवं ऐश माउंट निर्माण से संबंधित सहमति पत्र पर जनप्रतिनिधियों के भी हस्ताक्षर हैं।
ऐसे में सहमति पत्र की शर्तों का पालन सुनिश्चित कराना और विस्थापितों के अधिकारों की रक्षा करना उनका नैतिक एवं संवैधानिक दायित्व है। विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व बलकूदरा मुखिया विजय मुंडा ने किया। विरोध प्रदर्शन में बिजेंद्र मुंडा, लालू महतो, पंचम साव, हरि सिंह, आनंद कुमार, विजय ठाकुर, विकास कुमार, अंकित कुमार, कपिल कुमार, चीकू कुमार, अमित कुमार, नंदू कुमार, राहुल कुमार, प्रेमनाथ यादव, महावीर महतो, मेघा प्रजापति, शंकर प्रजापति, शनि प्रजापति, सनोज, अमित कुमार, विपिन उरांव, सतीश प्रजापति, सचिन कुमार, रोहित कुमार, रामप्रसाद प्रजापति, अनिल कुमार, नीरज कुमार, अंकित कुमार, विकास कुमार, आनंद कुमार, विकास मुंडा, विक्रम उरांव, आलोक कुमार, दीपक कुमार, छोटू मुंडा, राजेश ठाकुर सहित बड़ी संख्या में विस्थापित एवं प्रभावित ग्रामीण उपस्थित थे।
