रिपोर्ट आरिफ कुरैशी
रामगढ़। झारखंड राज्य के रामगढ़ जिले के चितरपुर प्रखंड अंतर्गत ‘पूर्वी चितरपुर’ गांव की निवासी आरती देवी (पति बिरेन्द्र चौधरी) के परिवार की आर्थिक स्थिति कुछ समय पहले तक अत्यंत सामान्य थी। सात सदस्यों के इस संयुक्त परिवार (पति, तीन बच्चे और सास-ससुर) की पूरी आजीविका पारंपरिक कृषि पर टिकी हुई थी। परिवार में आश्रितों की संख्या अधिक और आर्थिक स्रोत सीमित होने के कारण, खेती की अनिश्चित आय से घर चलाना एक अत्यंत कठिन कार्य था।
इस वित्तीय संकट के बीच बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना और परिवार की बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति करना उनके जीवन का सबसे बड़ा संघर्ष था।” आरती देवी के जीवन में असली बदलाव तब आया जब वर्ष 2017 में उन्होंने झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) द्वारा दिनांक 15-12-2017 को गठित ‘रानी आजीविका सखी मंडल’ की सदस्यता ली। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने हर हफ्ते ₹20 की बचत करना शुरु किया।
यह सिर्फ पैसों की बचत नहीं थी, बल्कि उनके आत्मनिर्भर बनने के सपने की पहली सीढ़ी थी। नियमित बैठकों में शामिल होने से उन्हें वित्तीय लेन-देन और व्यावसायिक गतिविधियों की समझ मिलने लगी, जिसने उनके भीतर एक नया आत्मविश्वास जगाया। अपनी आजीविका को मजबूत करने के लिए आरती देवी ने समूह के माध्यम से पहली बार ₹25,000 का सामुदायिक निवेश कोष (सीआईएफ) ऋण लिया। इस राशि का उपयोग उन्होंने खेती के लिए उन्नत खाद-बीज खरीदने और 5 बकरियां खरीदने में किया और छोटे स्तर पर बकरी पालन का व्यवसाय शुरू किया।
फिर उन्हें पशुपालन विभाग से बकरी पालन का प्रशिक्षण मिला और मुख्य मंत्री पशुधन विकास योजना के तहत 2 बकरा और 8 बकरियां 75 प्रतिशत अनुदान में मिला। आज उनके पास बकरियों की संख्या बढ़कर 20 हो गया है। पिछले वर्ष और बकरियां बेचकर अच्छा मुनाफा कमाई थी। बकरी पालन के साथ उन्होंने अपने पारंपरिक खेती के तरीके में सुधार किया। इस शुरुआती प्रयास से परिवार की आय में बढ़ोतरी होने लगी, जिससे उनका हौसला और मजबूत हो गया।
पहले ऋण की सफलता के बाद, आरती देवी के हौसले को तब और पंख मिले जब उन्हें बैंक लिंकेज (बैंक लिंकेज) के माध्यम से ₹2,25,000 का बड़ा ऋण स्वीकृत हुआ। इस राशि से उन्होंने अच्छे नस्ल की 3 गायें खरीदीं और उनकी पोस्टिक आहार के लिए चारा खरीदी। आज गायों की संख्या 4 से बढ़कर 6 हो गया है। जिससे उनका एक अच्छा डेयरी फार्म स्थापित हो चुका है। अपनी सूझबूझ और कड़ी मेहनत से उन्होंने दूध उत्पादन और पनीर निर्माण को अपनी आजीविका का मुख्य जरिया बना लिया है। वर्तमान में आरती देवी के डेयरी फार्म से प्रतिदिन औसतन 30 लीटर दूध का उत्पादन होता है।
इसमें से 2 लीटर दूध वह अपने परिवार और बच्चों के पोषण के लिए घर में रखती हैं। बचे हुए दूध में से 20 लीटर दूध वह प्रतिदिन बाजार में सीधा ₹50 प्रति लीटर की दर से बेचती हैं, जिससे उन्हें रोज ₹1,000 (मासिक ₹30,000) की आय होती है। बाकी बचे 8 लीटर दूध से वह प्रतिदिन 2 किलो ताजा पनीर तैयार करती हैं, जो बाजार में ₹300 प्रति किलो की दर से बिकता है। इससे उन्हें रोज ₹600 (मासिक ₹18,000) की अतिरिक्त कमाई होती है। इस प्रकार, दूध और पनीर बेचकर उनकी कुल मासिक सकल आय ₹48,000 तक पहुँच जाती है।
शुरुआत में पशुओं के रख-रखाव और बड़े स्तर पर व्यवसाय को संभालने में कई चुनौतियाँ आईं। लेकिन ‘एकता आजीविका महिला ग्राम संगठन’ (वीओ) और ‘चितरपुर आजीविका महिला संकुल संगठन’ (सीएलएफ) के मार्गदर्शन तथा जेएसएलपीएस के सहयोग से उन्होंने हर समस्या को पार कर लिया। आज इस ₹48,000 की मासिक सकल आय में से पशुओं के दाने, चारे और रख-रखाव का खर्च निकालने के बाद, उन्हें हर महीने ₹20,000 की शुद्ध बचत (शुद्ध लाभ) होती है। इस प्रकार, खेती, डेयरी और बकरी पालन मिलाकर आरती देवी ₹3,00000 की शुद्ध वार्षिक आय अर्जित कर रही हैं।
आरती देवी का मानना है कि जेएसएलपीएस और सखी मंडल से जुड़ने के बाद न केवल उनकी आर्थिक स्थिति सुधरी है, बल्कि समाज में उनका सम्मान भी बढ़ा है। बैठकों में भाग लेने से उनका झिझक दूर हुआ है और उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा। वह अब पूरी तरह आत्मनिर्भर हैं और अपने पूरे परिवार की रीढ़ बन चुकी हैं। भविष्य में वह अपने इस व्यवसाय को और बड़े स्तर पर ले जाना चाहती हैं। आरती देवी आज अपने गाँव और आस-पास की अन्य महिलाओं के लिए एक रोल मॉडल (प्रेरणास्रोत) बन चुकी हैं, जो यह साबित करती हैं कि अगर महिलाओं को सही अवसर और सहयोग मिले, तो वे अपनी किस्मत खुद बदल सकती हैं।