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चलिए, आप सभी को भैरवी जलाशय, दुलमी के निर्माण के इतिहास से रूबरू कराते हैं

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रिपोर्ट सज्जाद आरिफ

दुलमी । भैरवी (भैरवा) जलाशय परियोजना की शुरुआत 1960 के दशक में अविभाजित बिहार के समय हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को सालभर सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराना था। लेकिन यह परियोजना कई दशकों तक अधूरी, उपेक्षित और विवादों में घिरी रही। शुरुआत में इसकी अनुमानित लागत लगभग ₹20 करोड़ थी, लेकिन लंबे विलंब, प्रशासनिक सुस्ती और अधूरे कार्यों के कारण इसकी लागत बढ़ते-बढ़ते 135 करोड़ से अधिक पहुँच गई।

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यह परियोजना सिर्फ एक सिंचाई योजना नहीं रही, बल्कि समय के साथ यह विस्थापन, मुआवजा, पुनर्वास, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और ग्रामीण आंदोलनों का बड़ा मुद्दा बन गई। हजारों लोगों की जमीन गई, कई परिवार प्रभावित हुए, लेकिन आज भी बहुत लोगों के मन में यह सवाल है कि क्या उन्हें उनकी कुर्बानी का पूरा सम्मान और अधिकार मिला? साल 2001 में झारखंड राज्य गठन के बाद तत्कालीन प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के कार्यकाल में इस परियोजना को पुनर्जीवित किया गया।

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इसके बाद अलग-अलग सरकारों के दौरान काम आगे बढ़ता रहा। लेकिन झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री एवं रामगढ़ जिला निर्माता चंद्र प्रकाश चौधरी के दृढ़ इच्छाशक्ति और प्रयासों से उनके कार्यकाल में जलाशय का मुख्य निर्माण कार्य वर्ष 2015–16 तक काफी हद तक पूरा हो सका। उस समय झारखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास थे। लेकिन परियोजना की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी — नहर नेटवर्क और खेतों तक सिंचाई व्यवस्था अधूरी थी,

जिसका कारण बना माननीय पूर्व मंत्री श्री चंद्रप्रकाश चौधरी जी का गिरिडीह चला जाना और वहाँ का सांसद निर्वाचित होना। लेकिन फिर भी सांसद महोदय लगे रहे और माननीय पूर्व विधायक एवं तत्कालीन विधायक सुनीता चौधरी ने विधानसभा में प्रश्न उठाने सहित संबंधित विभाग के साथ सामंजस्य बनाकर अपने कार्यकाल में नहर निर्माण के 318 करोड़ का टेंडर निकाला गया, जो युद्ध स्तर पर कार्य जारी है।भैरवी जलाशय आज ट्रेंडिंग में है।

दुलमी प्रखण्ड क्षेत्र के हजारों लोग विस्थापित हुए जिसमें प्रखंड अध्यक्ष पंकज कुमार का परिवार भी शामिल है जिन्होंने डैम निर्माण हेतु लगभग 20 एकड़ भूमि के अधिग्रहण का प्रभावित रहा है। आजसू प्रखंड अध्यक्ष पंकज कुमार बताते हैं कि इसी कारण आज मैं भी अपने साथियों के साथ भैरवी जलाशय में डुबकी लगाने चला गया। आनंद भी आया, लेकिन अपनी जमीन चले जाने का दर्द आज भी मन में है। खैर, समय के साथ बहुत कुछ स्वीकार करना पड़ता है।

G. Reddy

जी रेड्डी एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो निष्पक्ष और सटीक रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। वे "समाचार संध्या" नामक वेब पोर्टल संचालित करते हैं, जो समसामयिक घटनाओं पर गहरी विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग करता है। उनका उद्देश्य समाज को सही और विश्वसनीय जानकारी प्रदान करना है।
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