कभी धोनी समेत रणजी खिलाड़ियों की प्रतिभा का साक्षी रहा मैदान, आज बदहाली पर बहा रहा आंसू; ग्रामीणों ने सीसीएल प्रबंधन, सांसद और विधायक से की हस्तक्षेप की मांग
भुरकुंडा (रामगढ़)। कभी राज्य स्तरीय क्रिकेट प्रतियोगिताओं की पहचान रहा सयाल का ऐतिहासिक हिल व्यू स्टेडियम आज अपनी बदहाली पर आंसू बहाने को मजबूर है। एक समय था जब इस मैदान पर भारत के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी, आदिल हुसैन, संतोष लाल समेत दर्जनों रणजी खिलाड़ियों ने अपने खेल का जलवा बिखेरा था और हजारों खेलप्रेमी यहां उमड़ते थे। लेकिन वर्तमान में यह स्टेडियम उपेक्षा का शिकार होकर गंदगी, अव्यवस्था और असामाजिक तत्वों का अड्डा बनता जा रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों और खेलप्रेमियों का कहना है कि कभी खिलाड़ियों की प्रतिभा को निखारने वाला यह मैदान आज चारों ओर फैली गंदगी से पट गया है। नियमित साफ-सफाई और रखरखाव के अभाव में मैदान की स्थिति दिन-प्रतिदिन खराब होती जा रही है। हालात ऐसे हैं कि यहां खेल गतिविधियां लगभग बंद हो चुकी हैं और शाम होते ही असामाजिक तत्वों एवं नशेड़ियों का जमावड़ा लगने लगता है। ग्रामीणों ने बताया कि हिल व्यू स्टेडियम का इतिहास गौरवशाली रहा है। यहां आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय क्रिकेट टूर्नामेंट में झारखंड और आसपास के क्षेत्रों के कई प्रतिभाशाली खिलाड़ियों ने भाग लिया था। इसी मैदान पर खेलते हुए कई खिलाड़ी आगे चलकर रणजी और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे। लेकिन आज वही मैदान अपनी पहचान खोता नजर आ रहा है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि सीसीएल प्रबंधन द्वारा मैदान का सुंदरीकरण, समतलीकरण और नियमित साफ-सफाई कराई जाए तो यह मैदान एक बार फिर क्षेत्र के युवाओं के लिए खेल गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन सकता है। इससे युवाओं को खेल के प्रति प्रोत्साहन मिलेगा और वे नशा, जुआ तथा अन्य सामाजिक बुराइयों से दूर रह सकेंगे। ग्रामीणों ने सीसीएल बरका सयाल के प्रबंधक अजय कुमार सिंह, हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र के सांसद मनीष जायसवाल तथा बड़कागांव विधायक रोशन लाल चौधरी से भी इस दिशा में पहल करने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि सांसद और विधायक इस ऐतिहासिक मैदान के संरक्षण और विकास को लेकर गंभीर पहल करें तो हिल व्यू स्टेडियम का फिर से कायाकल्प हो सकता है। इससे क्षेत्र में खेल संस्कृति को नई पहचान मिलेगी और आने वाले समय में महेंद्र सिंह धोनी जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी फिर से इस धरती से निकलकर राज्य और देश का नाम रोशन कर सकते हैं। अब देखना यह होगा कि सीसीएल प्रबंधन, जनप्रतिनिधि और संबंधित विभाग इस ऐतिहासिक खेल मैदान को बचाने और उसकी खोई हुई पहचान लौटाने के लिए क्या कदम उठाते हैं। खेलप्रेमियों और ग्रामीणों की निगाहें अब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की पहल पर टिकी हुई हैं।