रिपोर्ट एस कुमार
गिद्दी/सिरका। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) के रैलीगढ़ा (गिद्दी) स्थित कार्यालय में महान जननेता, प्रखर समाजवादी चिंतक, झारखंड आंदोलन के अग्रणी नेता तथा मजदूर-किसान संघर्षों के प्रतीक कॉमरेड ए. के. रॉय की सातवीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉमरेड सुन्दरलाल बेदिया ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ कॉमरेड ए. के. रॉय के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया।
उपस्थित साथियों ने उनके संघर्षपूर्ण जीवन, सादगी, ईमानदारी और जनपक्षधर राजनीति को याद करते हुए उनके अधूरे सपनों को साकार करने का संकल्प लिया। सभा को संबोधित करते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) के केंद्रीय सदस्य कॉमरेड आर. डी. मांझी, मजदूर नेता धनेश्वर तुरी, प्रखंड सचिव अशोक गुप्ता, किसान नेता शाहिद अंसारी तथा सोहराय किस्कू ने कहा कि कॉमरेड ए. के. रॉय ने अपना संपूर्ण जीवन मजदूरों, किसानों, आदिवासियों, दलितों, गरीबों और शोषित-पीड़ित वर्गों के अधिकारों की लड़ाई के लिए समर्पित कर दिया।
उन्होंने सत्ता और पद की राजनीति के बजाय जनसंघर्षों को अपनी राजनीति का आधार बनाया। उनका जीवन अन्याय, शोषण, विस्थापन और कॉरपोरेट लूट के विरुद्ध संघर्ष का प्रतीक रहा। वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में श्रम कानूनों को कमजोर किया जा रहा है, सार्वजनिक उपक्रमों का तेजी से निजीकरण हो रहा है तथा प्राकृतिक संसाधनों पर कॉरपोरेट घरानों का कब्जा लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे दौर में कॉमरेड ए. के. रॉय के विचार पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हैं। उनका जीवन अन्याय के विरुद्ध संगठित होकर लोकतांत्रिक एवं जनपक्षीय संघर्षों को मजबूत करने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि झारखंड राज्य के निर्माण की वैचारिक नींव रखने वाले प्रमुख नेताओं में कॉमरेड ए. के. रॉय का महत्वपूर्ण योगदान रहा। उन्होंने हमेशा जल, जंगल, जमीन और खनिज संपदा पर स्थानीय जनता के अधिकार, सामाजिक न्याय, धर्मनिरपेक्षता तथा लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की आवाज बुलंद की। उनका सपना ऐसा झारखंड था, जहां विकास का लाभ मेहनतकश जनता तक पहुंचे और समाज शोषण, अन्याय तथा असमानता से मुक्त हो।
सभा में देश की वर्तमान राजनीतिक एवं सामाजिक परिस्थितियों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा, रोजगार, लोकतांत्रिक अधिकारों और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर जंतर-मंतर से लेकर देश के विभिन्न राज्यों में चल रहे छात्र-युवा आंदोलनों ने संघर्ष की नई दिशा दी है। सभा में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) तथा इंकलाबी नौजवान सभा के उन सभी साथियों के संघर्षों का समर्थन किया गया, जो शिक्षा बचाओ, प्रश्नपत्र लीक, बेरोजगारी, लोकतांत्रिक अधिकारों और जनसरोकारों के मुद्दों पर लगातार आंदोलनरत हैं।
वक्ताओं ने कहा कि इन संघर्षों को व्यापक जनसमर्थन मिलना चाहिए और देशभर के लोकतांत्रिक आंदोलनों के साथ एकजुटता समय की आवश्यकता है। बैठक में संगठन विस्तार पर भी चर्चा हुई। निर्णय लिया गया कि झारखंड मजदूर सभा के राज्यव्यापी सदस्यता अभियान को और तेज किया जाएगा। साथ ही डाड़ी प्रखंड में संगठित एवं असंगठित मजदूरों को झारखंड मजदूर सभा से जोड़ने, उनके अधिकारों की रक्षा करने तथा मजदूरों के मुद्दों पर मजबूत जनसंघर्ष खड़ा करने के लिए व्यापक सदस्यता अभियान चलाया जाएगा।
सभा के अंत में उपस्थित सभी साथियों ने कॉमरेड ए. के. रॉय के सपनों के झारखंड तथा शोषणमुक्त, समानतामूलक और लोकतांत्रिक समाज के निर्माण के लिए संघर्ष को और मजबूत करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में सुरेश बेदिया, अजीत प्रजापति, उमेश राम, देवनारायण गोप, हरिप्रसाद, मझला मांझी, इस्लाम अंसारी, हकीम अंसारी, आजाद अंसारी, कैलाश महतो, ललित महतो, खेमलाल बेदिया, जगदीश महतो, चेतन बेदिया, मोहम्मद होसेन, हरखु बेदिया, राजेश कुमार, वीरेन्द्र गंझू, महेश मुंडा, मोहम्मद मजहर, रामधनी मुंडा, मेकलाल महतो, शिशुपाल महतो, केसु महतो, इन्द्रजीत महतो, रामु सिंह, चमन गंझू, तुलसीदास मांझी, काली दा, रसका हेंब्रम, अमृत राणा, लाला मांझी, शिवकुमार टुडू, जगमोहन महतो, धनेश्वर महतो, खिरोधर करमाली, दशरथ सिंह, सत्यनारायण प्रसाद, महेश बेदिया सहित बड़ी संख्या में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) के कार्यकर्ता, मजदूर, किसान एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित थे।