रजरप्पा। सीसीएल रजरप्पा क्षेत्र के ऑफिसर क्लब मे प्रगतिशील लेखक संघ(प्रलेस), झारखंड का दो दिवसीय पाँचवाँ राज्य सम्मेलन का आयोजन का शुभारम्भ किया गया, 25 एवं 26 जुलाई तक दो दिवसीय कार्यक्रम आयोजित होगा,रजरप्पा स्थित खगेन्द्र ठाकुर नगर, ऑफ़िसर्स क्लब,सीसीएल,प्रगतिशील लेखक संघ का रामगढ़ मे शुरू वात हुआ। स्वतंत्रता,समता और सृजन की प्रतिबद्धता के नब्बे साल के उत्सव की शुरुआत प्रलेस ने अपना झंडोत्तोलन कर किया। राज्य सम्मेलन के मौके पर प्रलेस के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. सुखदेव सिंह सिरसा शामिल हुए।

उद्घाटन सत्र की शुरुआत इप्टा के साथियों द्वारा शैलेंद्र के गीत तू जिंदा है तो ज़िन्दगी की जीत पर यकीन कर* गाकर किया। खोरठा के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. बी. एन. ओहदार ने स्वागत भाषण किया। इप्टा की राज्य महासचिव अर्पिता ने एकजुट होने की बात कही। ऐसी प्रगतिशीलता हो जिसमें महिलाओं और हाशिए के लोगों की आवाजें बराबर शामिल हो।वक्ताओं ने लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करने एवम् सामाजिक न्याय, जनपक्षधारी और प्रगतिवादी लेखन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
सुखदेव सिंह सिरसा ने कहा कि ‘यह नब्बे वर्ष सिर्फ़ उत्सव नहीं बल्कि सफलता,असफलता और चुनौतियों का आँकलन का भी है’। कथाकार रणेन्द्र ने हिंदी के अतिरिक्त अन्य भाषाओं में प्रगतिवादी धारा के प्रभावों को रेखांकित करते हुए कहा कि ‘यह प्रभाव शास्त्रीय संगीत में भी देखा जा सकता है।’ ‘चालू किस्म का साहित्य नहीं बल्कि गंभीर और प्रगतिशील साहित्य की आवश्यकता का आंकलन अहमद बद्र ने किया। प्रो. रामानन्दन सिंह ने अन्य साथियों को सृजन एवम् संगठन के लिए प्रेरित करने की बात कही। इस सत्र में शैलेन्द्र, प्रो अहमद बद्र, पंकज मित्र, रणेंद्र , अनीस अंकुर, गुंजल मुंडा, आदि ने भी संबोधित किया।

दो दिवसीय इस सम्मेलन में साहित्य,संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर साहित्यकार, संस्कृतिकर्मी,शोधार्थी,विद्यार्थी और तरक़्क़ीपसंद लोग विभिन्न सत्रों में विचार-विमर्श कर रहे हैं। उद्घाटन सत्र का संचालन राज्य महासचिव डॉ मिथिलेश ने किया। आयोजन समिति के सचिव पॉवेल कुमार ने धन्यवाद दिया। क्रांति और भूख एक आंतरिक दृष्टि है, विद्रोही कवि सुकांत भट्टाचार्य पर बोलते हुए पार्थ बनर्जी ने कहा। दूसरा सत्र पुरखे रचनाकारों पर आधारित रही। सुकांत भट्टाचार्य, विजयदान देथा,महाश्वेता देवी, अमरकांत और डॉ नामवर सिंह पर कमल, पार्थ बनर्जी, डॉ प्रज्ञा गुप्ता, ने वक्तव्य दिया।
नियाज़ अख्तर, निशि प्रभा और रणेंद्र ने अध्यक्षता की। संजय सोलोमन ने सत्र का संचालन किया। शाम को रायपुर से आए इप्टा के वरिष्ठ रंगकर्मी नाचा थियेटर विशेषज्ञ निसार अली और उनके साथियों ने बेहतरीन नाटक प्रस्तुत किया। सम्मेलन का दूसरा दिन वैचारिक सत्रों के साथ ही युवा साथियों के कविता पाठ के साथ राज्य के प्रगतिशील साहित्य आंदोलन के लिए यादगार होने जा रहा है।
विद्वानो के द्वारा अलग अलग महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किये. प्रो शशि ने बताया की रीढ़ है उसकी दृढ़ संकल्पित विचार धारा विचारों का शशक्त संगठन की आवश्यकता है, जिसमे संस्कृतिक मजबूती को सिंचित करने की जरूरत है प्रगतिशील संगठन को आगे बढ़ाने के लिए काफ़ी संघर्ष और परिश्रम के बल पर भारी संख्या मे लोगों को जोड़ने की आवश्यकता है तभी तभी हमारा सुदृढ़ समाज का निर्माण संभव हो सकता है।