रजरप्पा। गिरिडीह लोकसभा क्षेत्र के यशस्वी सांसद चन्द्र प्रकाश चौधरी का कहना हैं कि किसी भी समाज की निर्माण मे अपनी भाषा,संस्कृति और धार्मिक आस्था उसकी सबसे बड़ी पहचान होती है। जिसे समाज की पहचान सुरक्षित रहेगी तो संस्कृति सुरक्षित रहेगी और संस्कृति सुरक्षित होगी तो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी सुरक्षित रहेगा।
इसी सोच और संकल्प के साथ सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी ने नई दिल्ली में आदिबासी कुड़मी समाज, केंद्रीय समिति के प्रतिनिधिमंडल जमशेदपुर सांसद बिद्युतवरण महतो तथा सांसद पुरुलिया बंगाल ज्योतिर्मय सिंह महतो के साथ भारत के रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त (ORGI) को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया।
ज्ञापन के माध्यम से जनगणना-2026 में “कुड़मी/सरना-कुड़मी धर्म” के लिए पृथक धर्म कोड तथा “कुड़मी/कुड़माली” के लिए पृथक मातृभाषा/भाषा कोड प्रदान करने की मांग की गई। सांसद चन्द्रप्रकाश चौधरी ने कहा कि झारखंड,पश्चिम बंगाल, ओडिशा,बिहार,असम और छत्तीसगढ़ सहित देश के अनेक राज्यों में निवास करने वाला कुड़मी समाज अपनी विशिष्ट भाषा,समृद्ध लोक-साहित्य, सांस्कृतिक विरासत,पूर्वजों के कार्यकाल से हम प्रकृति-पूजक धार्मिक परंपराओं और गौरवशाली इतिहास के कारण एक अलग पहचान रखता है।
इसके बावजूद जनगणना में पृथक धर्म एवं भाषा कोड उपलब्ध नहीं होने से समाज की वास्तविक धार्मिक और भाषाई पहचान आधिकारिक आंकड़ों में दर्ज नहीं हो पाती, जिससे करोड़ों लोगों की सांस्कृतिक पहचान का समुचित अभिलेखन प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान का मूल दर्शन “विविधता में एकता” है। संविधान के अनुच्छेद 29, 30, 350A एवं 350B विभिन्न समुदायों की भाषा, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण का संवैधानिक आधार प्रदान करते हैं।
ऐसे में जनगणना में समुदाय की स्व-घोषित धार्मिक एवं भाषाई पहचान को पृथक रूप से दर्ज करना सामाजिक न्याय, सांस्कृतिक संरक्षण और संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप एक आवश्यक कदम है। गिरिडीह सांसद चन्द्रप्रकाश चौधरी ने स्पष्ट किया की यह मांग किसी विशेष सुविधा या लाभ के लिए नहीं बल्कि कुड़मी समाज की सम्मानजनक पहचान, सांस्कृतिक संरक्षण, ऐतिहासिक न्याय और संवैधानिक अधिकार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाई गई है।
उन्होंने कहा कि समाज की पारंपरिक प्रकृति-पूजक है आस्था को भी स्वतंत्र पहचान मिलनी चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत सरकार जनभावनाओं का सम्मान करते हुए जनगणना-2026 के प्रपत्रों एवं दिशा-निर्देशों में आवश्यक संशोधन कर “कुड़मी/सरना-कुड़मी धर्म” तथा “कुड़मी/कुड़माली” के लिए पृथक कोड सुनिश्चित करने की दिशा में सकारात्मक निर्णय लेगी।
